फर्जी नियुक्ति कर स्टूडेंट को बनाया टीचर, प्यून को मिलती रही दो सैलरी


  • शिक्षक की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी
  • परिचर बना शिक्षक, मिलती रही दो सैलरी
  • निदेशालय ने डीआईओएस से मांगी रिपोर्ट
गाजीपुर। मरदह ब्लाक के बरही गांव के वित्तपोषित स्कूल शांति निकेतन इंटर कालेज में शिक्षकों और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्तियों में भारी अनियमितता प्रकाश में आयी है। स्कूल प्रबंधक ने एक छात्र को नियुक्त टीचर दिखा कर सैलरी पास कर दी, वहीं एक चपरासी को भी शिक्षक के पद पर नियुक्त दिखा दो पदों की सैलरी निकालने का मामला सामने आया है।
नियुक्ति में नियमों की अनदेखी
शांति निकेतन इंटर कालेज के मैनेजमेंट ने नियमों की अनदेखी कर कई नियुक्तियां करने का मामला सामने आया है। मैनेजमेंट ने कोमल सिंह यादव नाम के व्यक्ति की नियुक्ति सहायक टीचर के तौर पर कर दी,आफिस रेकॉर्ड के अनुसार यह नियुक्ति 1 सितंबर 1993 को की गयी। वहीं स्कूल रेकॉर्ड से ही यह बात भी सामने आयी की कोमल यादव साल 1996 से लेकर 1998 तक इसी स्कूल में इंटर का स्टूडेंट रहा है। जब कोमल 1998 में इंटर पास किया तो उसकी नियुक्ति 1993 में शिक्षक के तौर पर कैसे कर दी गयी।
परिचर बना शिक्षक, मिलती रही दो सैलरी
वहीं रामध्यान सिंह यादव की साल 1980 में चतुर्थ श्रेणी वर्ग में नियुक्ति की गयी। इस दौरान 1986 से 1998 तक उनको चतुर्थ श्रेणी वर्ग की सैलरी मिलती रही।1992 में रामध्यान को सहायक अध्यापक नियुक्त कर दिया गया। नियुक्ति के बाद 1992 से 1998 तक उनको दो सैलरी दिए जाने का मामला सामने आया है।
निदेशालय ने डीआईओएस से मांगी रिपोर्ट
सवाल यह उठता है कि जब वह 1992 में ही शिक्षक नियुक्त हो गए तो एक पद पर दो सैलेरी (शिक्षक+परिचर) उन्हें बीच के सालों में कैसे दी गयी। अब इस मामले में निदेशालय ने डीआईओएस से रिपोर्ट मांगी है। कोमल यादव को साल 2008 तक और रामध्यान यादव को साल 2000 तक पेमेंट किए जाने की बात कही जा रही है।
निदेशालय को भेजी गयी आख्या
डीआईओएस ओपी राय ने इस मामले में बताया कि प्रकरण काफी पुराना है। निदेशालय के आदेश पर रिपोर्ट को प्रेषित कर दिया गया है। अब इस मामले में जो भी एक्शन होगा वह निदेशालय के आदेश के आधार पर होगा।