सुशील कुमार को जेल में नहीं मिल रहा भरपेट खाना? जेल अधिकारियों ने दिया सवाल का जवाब


  • दिल्‍ली की मंडोली जेल में बंद है नामी पहलवान सुशील कुमार
  • एक्‍स्‍ट्रा प्रोटीन वाला खाना चाहिए, प्रशासन कर रहा विचार
  • डॉक्‍टर सिफारिश करेंगे तो ही मिल पाएगा एक्‍स्‍ट्रा प्रोटीन फूड
  • फिलहाल कैंटीन से दूध, आम और दूसरे फल मंगा रहे सुशील
नई दिल्‍ली। मैट पर बड़े-बड़े पहलवानों को मात देने वाले सुशील कुमार को जेल में मनमुताबिक खाना नहीं मिल रहा है। बतौर पहलवान उसकी डाइट बाकी कैदियों से ज्‍यादा है मगर नियमानुसार उसे जितना भोजन दिया जा सकता है, उतना ही मिल रहा है। फिलहाल सुशील कुमार जेल कैंटीन से दूध, आम, तरबूज समेत अन्‍य फल खा रहा है। जेल प्रशासन के अनुसार, अगर सुशील मांग करते हैं कि उन्‍हें अतिरिक्‍त प्रोटीन वाला खाना दिया जाए तो उसपर विचार होगा।
डॉक्‍टर तय करेंगे, सुशील को क्‍या खाना मिलेगा
सुशील कुमार एक सीमा तक ही कैंटीन से चीजें खरीदकर खा सकते हैं। जेल अधिकारियों ने कहा कि अगर वे डिमांड करते हैं तो डॉक्‍टर तय करेंगे कि उन्‍हें कितनी डाइट दी जाए। अगर डॉक्‍टर कहेंगे कि सुशील को एक्‍स्‍ट्रा प्रोटीन और अतिरिक्‍त खाना मिलना चाहिए, तो ही जेल प्रशासन उन्‍हें यह सब उपलब्ध कराएगा। दूसरा रास्‍ता यह है कि सुशील कोर्ट में इसके लिए दरख्‍वास्‍त करें और वहां से आदेश होने पर उनको मनमुताबिक खाना मिले।
मंडोली जेल प्रशासन के अनुसार, सुशील कुमार को बाकी कैदियों जितनी डाइट ही दी जा रही है। मंडोली मेल में करीब 16 हजार कैदी हैं। उन्‍हें रोज दो वक्‍त 8-10 रोटियां दी जाती हैं। मांगने पर 2-3 रोटी एक्‍स्‍ट्रा मिलती हैं। दाल, सब्‍जी, चावल भी कैदियों को दिया जाता है। सुशील का कहना है कि उनका पेट अन्य कैदियों को मिलने वाली खुराक से नहीं भरने वाला। उन्हें कुछ एक्स्ट्रा प्रोटीन और अधिक खाना चाहिए होता है।
सेल में अकेले रखे गए हैं सुशील
पहलवान सुशील को जिस जेल नंबर-15 में रखा गया है, यह मंडोली की हाई रिस्क जेल है। इसमें अधिकतर चक्की यानी सेल ही हैं। 100 से अधिक सेल वाली इस जेल के एक सेल में सुशील को अकेले रखा गया है। इनके साथ अन्य किसी कैदी को नहीं रखा गया है ताकि अन्य किसी गैंगस्टर या गैंग से इन्हें किसी तरह का खतरा पैदा न होने पाए। अन्य सेल की तरह इनके सेल में भी 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे से निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए एक जवान को अलग से तैनात कर दिया गया है। जवानों द्वारा अलग से भी निगरानी की जा रही है।
वैसे, आमतौर पर अन्य कैदियों को जेल प्रशासन कोरोना के चलते पहले 14 दिनों के लिए मंडोली की टेंपररी जेल में रखते हैं। लेकिन, मामला ओलिंपिक डबल मेडल विजेता पहलवान का है, इसलिए जेल प्रशासन ने कोई चांस न लेते हुए आरोपी को जेल नंबर-15 की अलग सेल में रखा है। इनके अन्य साथियों को इनके आसपास के सेल में रखा गया है।