बुंदेलखंड के जल जंगल जमीन का दोहन कब तक बर्दास्त करेगा बुन्देली : प्रवीण पाण्डेय


बक्सवाहा,(छतरपुर)। चिपको आंदोलन की तर्ज में बुंदेलखंड छतरपुर जनपद के बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के संरक्षक तारा पाटकर, सत्यनाथ हिन्दू के  नेतृत्व में कई संगठनों और समाजसेवियों ने बक्सवाहा पहुँच अपना विरोध दर्ज कराया।बीआरएस केंद्रीय अध्यक्ष इं प्रवीण पांडेय ने सभी साथियों के साथ बक्सवाहा वृक्षों को रक्षा सूत्र बांध कर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। उनका कहना था की बुंदेलखंड की जैव विविधता, और भौगोलिक स्वरूप पर कोई प्रहार नहीं होने देंगे चाहें मेरी जान क्यों न चली जाए। बीआरएस प्रमुख एडवोकेट डाल चंद्र का मानना हैं की बुंदेलखंड राज्य बनेगा तभी वहा की वन सम्पदा सुरक्षित रहेगी सभी बुंदेली साथ आईये इन्हे वोट मत दीजिये जब तक बुंदेलखंड नही बन जाता। डाल चंद्र कहते हैं की सरकार जिसकी लाठी उसकी भैस वाला काम कर रही हैं। 
जैसा की आप सब जानते हैं की अभी बुंदेलखंड के जंगलों में लगी आग बुझी नहीं है की वही मध्य प्रदेश सरकार चंद हीरो के खनन को लेकर समूचे बक्सवाहा के जंगल को काटने का टेंडर किसी कंपनी को दे रखा हैं। बीआरएस केंद्रीय प्रवक्ता देवब्रत त्रिपाठी बताते हैं की बक्सवाहा के जंगलों की लडाई सोशल मीडिया से अब बक्सवाहा के जंगलों तक आ पहुंची हैं। अब कई पर्यावरण शास्त्री और समाजसेवी बक्सवाहा जंगल धरने पर बैठ गए हैं। जिनका उग्र रूप सुंदरलाल बहुगुणा के चिपको आंदोलन से भी बड़ा प्रतीत होता हैं। आंदोलन में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से आये समाजसेवी पर्यावरण प्रेमियों में बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के  प्रवीण पांडेय, डाल चंद्र, देवब्रत,  बुन्देलखण्ड नव निर्माण सेना के विनय तिवारी, बुन्देली समाज के  तारा पाटकर , हिन्दू सत्यनाथ योगी ,सोनू पटेल , कश्यप सतीश त्रिपाठी , बजरंग सेना के रण बीर पटेरिया आदि संगठन के लोग मौजूद रहे। करोना काल में करोना नियमो का पालन करते हुए संगठनों के प्रमुख व्यक्ति रहे l