भाजपा ने ‘मीसा बंदियों’ को किया सम्मानित


दिल्ली ब्यूरो।
दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान भारतीय संस्कृति और लोकतंत्र को जितना नुकसान पहुंचाया है, उसकी भरपाई कठीन है। आपातकाल के 46 वर्ष पूरा होने पर प्रदेश कार्यालय में आयोजित आपातकाल बंदी सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए तत्कालिन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का बर्बरतापूर्वक दमन किया। सम्मान समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा, धर्मवीर शर्मा,  मूलचंद चावला, ओ पी बब्बर, डॉ नंद किशोर गर्ग,  राधे श्याम गुप्ता,  विवेक शर्मा,  हरबंस उप्पल सहित अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन प्रदेश उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सचदेवा ने किया।

आदेश गुप्ता ने कहा कि 1975 का साल भारतीय राजनीति का काला अध्याय साबित हुआ क्योंकि जिस बर्बरता से सत्ता लोभ में आपातकाल का विरोध करने वालो को गिरफ्तार कर जेल में डाला गया, वह पूरी तरह से लोकतंत्र का गला घोटना था। उन्होंने कहा कि बाद में जनता ने श्रीमती इंदिरा गांधी और कांग्रेस का जो हश्र किया उससे भी कांग्रेस ने सबक नहीं सीखा। जनसंघ ने तब भी लोकतंत्र को बचाने के लिए बलिदान दिया और आज भी भाजपा लोकतंत्र को बढ़ाने के लिए हर प्रयास कर रही है। लेकिन आपातकाल जैसी घटना से कांग्रेस के चरित्र को समझा जा सकता है कि जब वह सत्ता में होते हैं तो कैसा व्यवहार करते हैं। मीडिया, प्रेस सभी पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी।
गुप्ता ने कहा कि आज अगर भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो उसमें कही न कही उन सभी महानपुरुष का बलीदान, तप और संघर्ष छिपा है जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और यातनाएं सही। श्रीमती इंदिरा गांधी को हिटलर की संज्ञा देते हुए श्री गुप्ता ने उन सभी संघर्षकर्ताओं का धन्यवाद किया जिन्होंने आपातकाल जैसी निर्मम और निरंकुश निर्णय का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत को लोकतंत्र के मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ना है तो आने वाली पीढ़ी को भी आपातकाल जैसी बर्बर घटना के बारे में जानने की जरुरत है। 
प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि आपातकाल का वह दौर जब याद आता है तो रुह कांप जाती है क्योंकि उस वक्त जिन लोगों को जेल में बंद किया गया था, उनके घर किसी की मृत्यु हो, शादी हो या फिर अन्य कोई समारोह उसमें शामिल नहीं होने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि एक जेल के कमरे में जहां तीन से चार लोग सही से नहीं रह पाते वहां 15-20 लोगों को जानवरों की तरह बंद किया गया था, आप सभी उसके साक्षी हैं।