ब्राह्मण वोटरों को याद दिलाएंगे 2007 का मायावती शासन, बूथ स्तर पर 'विप्रों' को साधने में जुटी बीएसपी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ऐसा दांव चला है कि विरोधी पार्टियों के पसीने छूटने लगे हैं। बीएसपी विधानसभा चुनाव 2022 में सबसे कमजोर पार्टी मानी जा रही थी लेकिन मायावती के ‘ब्राह्मण पॉलिटिक्स फॉर्मूला’ ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार देखने को मिल रहा है। बीएसपी बूथ स्तर पर ब्राह्मण वोटरों को साधने की तैयारी कर रही है। सेक्टर प्रभारी नौसाद अली ने यहां तक दावा कर दिया है कि यूपी में बहनजी की सरकार पूर्ण बहुमत से बनने जा रही है।
उत्तर प्रदेश में 16 फीसदी ब्राह्मण हैं, जो किसी भी राजनीतिक पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने का दम रखते हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती को 2007 में ब्राह्मण वोट बैंक ने सत्ता तक पहुंचाया था। यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बहुत ही कम समय बचा है। एसपी, बीएसपी और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां इस बात को जानती हैं कि ब्राह्मण वोट बैंक एक बड़ा हिस्सा प्रदेश सरकार से नाराज है। इसका फायदा उठाते हुए सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण वोटरों को साधने में जुटे हैं।
बूथ स्तर पर ब्राह्मण वोटरों तक पहुंचने की योजना
कानपुर मंडल के केंद्रीय कार्यालय में बीएसपी की अहम बैठक थी, जिसमें कानपुर मंडल के 27 विधानसभा सीटों पर चुनावी योजना तैयार की गई। इस बैठक में मुख्य सेक्टर प्रभारी नौशाद अली और विधानसभा परिषद सदस्य भीमराव अम्बेडकर मौजूद रहे। दोनों पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर ब्राह्मण वोटरों तक पहुंचने के तौर तरीके समझाए। नौशाद अली ने कहा कि किसी भी तहर से ब्राह्मण वोटरों को पार्टी से जोड़ना है। बहन जी ने निर्देश दिए हैं कि ब्राह्मण वोटरों के घर-घर जाकर, बीएसपी में ब्राह्मणों की भागीदारी के संबंध में बताएं। उन्हे 2007 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाएं।
विधानसभा परिषद सदस्य भीमराव अम्बेडकर ने कहा कि बहन जी को पांचवी बार मुख्यमंत्री बनाना है, तो बूथ स्तर पर तैयारियों को और भी मजबूत करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि आप के सहयोग की जरूरत है। यदि पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता इस बात को ठान लेगा कि बहन जी को सत्ता तक पहुंचना है, तो किसी भी विपक्षी पार्टी में रोकने की दम नहीं है। इसके साथ कानपुर में ब्राह्मण सम्मेलन की तैयारियां करने के लिए भी कहा गया है।
अपनों ने छोड़ा साथ
बहुजन समाज पार्टी में मायावती के अलावा कोई दूसरा बड़ा चेहरा नहीं है। बीएसपी सुप्रीमों मायावती के अड़ियल रवैए की वजह से सभी सहयोगी उनका साथ छोड़कर चले गए। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर और लालजी वर्मा सरीखे नेता बसपा को बोझ लगने लगे थे। विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन का असर प्रदेश के समस्त जिलों में देखने को मिलने लगा था। पार्टी को जमीनी स्तर पर गहरा धक्का लगा है। लेकिन बसपा सुप्रीमों मायावती के ‘ब्राह्मण पॉलिटिक्स फॉर्मूला’ ने विरोधियों को चारो खाने चित्त करते हुए, पार्टी में नया जोश भर दिया है।