बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति की दो दिवसीय बैठक 3-4 जुलाई को बांदा सरस्वती विद्या मंदिर में


बांदा। बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के जनक स्वर्गीय शंकरलाल मल्होत्रा के स्वपन को पूरा करने की लड़ाई बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति लड़ती रहेगी। स्वर्गीय शंकरलाल मल्होत्रा ने बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को जो ऊंचाइयां दी। 2001 में क्रूर काल ने हम से उनको छीन लिया।  उसके बाद आंदोलन की धीमी गति को आगे बढ़ाने के लिए 2014 में  बुंदेलखंड राष्ट्र  समिति का गठन किया गया। 
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय संयोजक आदरणीय तारा पाटकर जी ने 28 जून 2018 से महोबा में अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए अनशन शुरू किया था जोकि लगातार 635 तीनों तक चला। करोना कॉल में अनशन को समाप्त कर दिया। तारा  ने बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के लिए कार्य कर रहे अन्य संगठनों को भी जागृत करने का प्रयास किया और उन्होंने महोबा के साथ अन्य जिलों में अनशन भी शुरू करवाया। लेकिन महोबा के अलावा अन्य जिलों में चल रहे अनशन चंद दिनों में ही लड़खड़ा गए। राष्ट्रीय संयोजक तारा जी के मार्गदर्शन में अब तक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 17 बार खून से पत्र लिख पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग की जा चुकी है। 
स्वर्गीय शंकरलाल मल्होत्रा के सपनों को पूरा करने के लिए तारा पाटकर जी के नेतृत्व बुंदेलखंड राष्ट्र समिति आगे बढ़ रही है। बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति द्वारा सभी सांसदों , विधायकों को कई बार ज्ञापन देकर उनके बुन्देलखण्ड राज्य के किए हुए वादे को याद दिलाने का कार्य किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव जी को भी ज्ञापन दिया गया। 
बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति सांसद पुस्पेंद्र चंदेल जी का आभार प्रकट करती है जिन्होंने सदन में बुन्देलखण्ड राज्य की मांग कई बार उठाया लेकिन अन्य सांसद खामोश रहे। 
सभी विधानसभा में बुन्देलखण्ड राज्य आन्दोलन को गति देने  के लिए पूर्णकालिक विस्तारक योजना बैठक कर रही है। पत्थर में लकीर खींचने का हुनर जिन्हें मालूम है जिन्हे  विस्तारक के नाम से हम लोग जानते है। 
किसी राजनीतिक दल को सत्ता में लाने का ऐतिहासिक कार्य कर सकते हैं तो अपनी मातृभूमि अपने जल जंगल जमीन पहाड़ बचाने के लिए भी हम आंदोलन कर सकते हैं और हम निश्चित सफल होंगे। 
यह समय बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के बहुत ही अनुकूल है। 

बुंदेलखंड के लिए हमको सबको एक जुट होकर इस लड़ाई को लड़ना है 
बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष इं प्रवीण पाण्डेय ने बताया कि बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति  बुन्देलखण्ड अलग राज्य के साथ  जंगल बचाने के लिए लगातार संघर्षरत है। बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए बुंदेलों ने बक्सवाहा जंगल जाकर वहां की माटी को चूमा, फिर अपने खून से खत लिखकर प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक से बक्सवाहा जंगल को कटने से बचाने के लिए गुहार लगाई, बक्सवाहा समेत पूरे बुंदेलखंड में बुंदेलों ने पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर उनको बचाने का संकल्प लिया लेकिन जब हीरा भंडार के लोभ में फंसी सरकार ने जंगल को बचाने के लिए अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी तो बुंदेले ऊपर वाले की अदालत में पहुंच गए एवं बक्सवाहा को बचाने के लिए हवन पूजन शुरू कर पूजन कर ईश्वर से प्रार्थना की कि 30 जून को एनजीटी व एक जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में बक्सवाहा जंगल को कटने से बचाने के पक्ष में फैसला हो। 3,4 जुलाई  की बैठक में आगामी योजनाएं पर चर्चा होगी। जंगल नदियां पहाड़ बचाओ , बुन्देलखण्ड राज्य बनाए जाने के संकल्प अभियान की समीक्षा कर और गति देने पर होगी चर्चा।