7 महीने से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर, पांच महिलाओं समेत 26 गिरफ्तार


  • सात महीने में ठग चुके हैं चार करोड़ से ज्यादा रुपये
  • गो ऑटो सॉफ्टवेयर का कर रहे थे इस्तेमाल
सुनील कुमार शर्मा,(दिल्ली ब्यूरो)। दक्षिण जिला पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने दिल्ली में बैठकर अमेरिकी लोगों को ठगने वाले एक कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर पांच महिलाओं समेत 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर का मालिक कयूम बताया जा रहा है, जोकि फरार है। आरोपी एक दिन में पांच से सात अमेरीकी नागरिकों से 2500 अमेरिकी डॉलर यानि डेढ़ लाख रुपये ठगते थे। ये कॉल सेंटर सात महीने से चल रहा था। इस तरह ये सैंकड़ों अमेरिकी नागरिकों से चार करोड़ से ज्यादा रुपये ठग चुके हैं।
दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर के अनुसार स्पेशल स्टाफ प्रभारी इंस्पेक्टर अतुल त्यागी को सूचना मिली थी कि फतेहपुरबेरी थाना इलाके में मांडी रोड पर सुल्तानपुर में एक इमारत में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। इस कॉल से अमेरिकी नागरिकों को ठगा जा रहा है। 
सूचना के बाद स्पेशल स्टाफ प्रभारी अतुल त्यागी, साइबर सेल प्रभारी राजीव मालिक, एसआई संजय, एएसआई अनिल और हवलदार नरेश आदि की विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने यहां एक इमारत में दबिश दी। कॉल सेंटर पहली मंजिल पर चल रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को ठग रहे पांच महिलाओं समेत 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
ये अमेरिकी नागरकिं को अमेजन सर्विस प्रोवाइडर बनकर ठगी करते थे और उन्हें वीओआईपी कॉल करते थे। कॉल सेंटर से 29 कंप्यूटर, तीन सर्वर, दो इंटरनेट स्वीचर, दो मॉर्डम और अन्य सामान बरामद किया है। आरोपी कॉल सेंटर को अवैध रूप से चला रहे थे। आरोपी वीओआईपी तरीके से अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे। ये वैध लीगल इंटरनेशनल डिस्टेंस (आईएलडी) को बायपास कर रहे थे। इस तरह ये केन्द्र सरकार को भी चूना लगा रहे थे।
इन्होंने कॉल सेंटर में सर्वर लगा रखे थे। इनको अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबर का डाटा मिल जाता था। इन्होंने गो ऑटो डॉयल सॉफ्टवेयर लिया हुआ था। ये अमेरिकी नागरिकों को ऑटोमेटिक कॉल लगा देता था। ये अमेजन के कर्मचारी बनकर अमेरिकी नागरिकों को कहते थे कि उनके अमेजन चार्जेज ज्यादा आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि उनका अमेजन आईडी हैक हो गया है। इस पर अमेरिकी नागरिक डर जाता था। इसके बाद अमेरिकी नागरिक इसे ठीक करने के लिए कहता था। 
ये एनीडेस्क एप आदि के जरिए पीड़ित के कम्प्यूटर को अपने कंप्यूटर से जोड़ लेते थे। ये वायरस डालकर पीड़ित को दिखा देते थे कि अमेजन आईडी हैक हो गया है। ये फिर ऐसे ही कुछ कर कहते थे कि उनका समस्या दूर कर दी गई है। ये कम्प्यूटर को ठीक करने के बहाने अमेरिका नागरिकों से चार्ज करते थे। ये अमेरिका नागरिकों से टॉरगेट कंपनी का कूपन खरीदने के लिए कहते थे। अमेरिका में बैठा व्यक्ति कूपन के पैसे भारत में आरोपियों को भेज देता था। कई बार ये पीड़ित के कंप्यूटर से गुप्त सूचना चुराकर उनके एकाउंट से पैसे निकाल लेते थे।
25 हजार से एक लाख तक की दी जा रही थी सैलरी 
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार कॉल सेंटर मालिक कयूम ने कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों को सैलरी पर रखा हुआ था। वह कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए विज्ञापन देता था। ये अमेरिकी अंग्रेजी बोलने वाले को नौकरी पर रखता था और उन्हें 25 हजार से एक लाख रुपये तक की तनख्वाह देता था। कॉल सेंटर की इमारत को किराए पर लेता था। कयूम इमारत का किराया 50 हजार रुपये प्रति माह देता था।