गवर्नर ने यूपी सरकार को रेफर की शबनम की दया याचिका, परिवार के 7 लोगों के कत्ल में मिली है फांसी


  • परिवार के 7 लोगों की हत्या मामले में शबनम को फांसी की सजा मिली है
  • अब शबनम की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है
  • इससे संबंधित दया याचिका को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास भेजा गया है
प्रयागराज ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने वाली शबनम की दया याचिका को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश सरकार के पास रेफर कर दिया है। राज्यपाल के पास फरवरी महीने में दया याचिका भेजी गई थी। प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली शबनम अपने प्रेमी सलीम के प्यार में इस कदर पागल थी कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने परिवार के सात सदस्यों का बेहद बेरहमी से कत्ल कर दिया था। मामले में शबनम और उसके प्रेमी सलीम को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
गवर्नर ने यूपी सरकार को किया मामला रेफर
इलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता सहर नकवी की ओर से सजा की मांग वाली अर्जी पर गवर्नर ने यूपी सरकार को पूरा मामला रेफर कर दिया है। गवर्नर आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह ने यूपी के कारागार विभाग के प्रमुख सचिन को मामले को कार्रवाई के लिए सौंपा है। नियमों के मुताबिक सही निर्णय लिए जाने का आदेश दिया गया है। नकवी ने गवर्नर को फरवरी माह में अर्जी भेजकर शबनम की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने किए जाने की मांग की थी। इस अर्जी में अधिवक्ता ने महिला होने के नाते फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी।
अर्जी में कहा गया है कि देश में अब तक किसी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई है। अर्जी में दलील दी गई है कि शबनम को फांसी दिए जाने से पूरी दुनिया में देश की छवि खराब हो सकती है, इसलिए शबनम को उसके अपराध की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए। अर्जी में शबनम के इकलौते बेटे 13 साल के ताज उर्फ बिट्टू का भी हवाला देकर सजा को उम्र कैद में बदलने मांग की गई है। दया याचिका में कहा गया है कि शबनम को फांसी दिए जाने से उसके बेटे का भविष्य के पर गलत असर पड़ सकता है।
अधिवक्ता सहर नकवी के मुताबिक इस दुनिया में बच्चों का कोई अपना नहीं है। मां को फांसी दिए जाने से बच्चे को जीवन भर लोगों की बातें सुननी पड़ेगी। फांसी की वजह से सामाजिक परिस्थितियों के चलते बच्चे का मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ेगा। अर्जी में ये भी कहा गया है की मां के अपराध की सजा बच्चों के लिए जाना कतई न्याय संगत नहीं होगा।
गवर्नर सचिवालय ने अधिवक्ता नकवी की अर्जी को उचित कार्रवाई के लिए यूपी सरकार को भेज दिया है। अब इस प्रकरण में यूपी सरकार के कारागार विभाग के प्रमुख सचिव से नियमों के मुताबिक सही फैसला लेंगे। मिली जानकारी के इलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता सहर नकवी को आदेश की कॉपी मिल चुकी है। महिला अधिवक्ता का यह कहना है की प्रमुख सचिव के यहां अब तमाम दलीलों और पुरानी नज्रों के आधार पर पैरवी की जाएगी।
अधिवक्ता के मुताबिक पैरवी मानवीय आधारों पर की जा रही है। इसमें फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की कोशिश है। शबनम और प्रेमी सलीम को माता पिता समेत दो भाइयों के साथ परिवार के सात सदस्यों की हत्या में दोषी ठहराया गया है। दोनों को फांसी की सजा कोर्ट ने सुनाई है। सलीम इस वक्त प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद है। फांसी की सजा से बचने के लिए शबनम और सलीम के पास बहुत कम रास्ते बचे हैं, क्योंकि राष्ट्रपति दया याचिका को खारिज कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश अमरोहा में अप्रैल 2008 में यह चर्चित कांड हुआ था। शबनम यूपी के बरेली जेल में बंद है। शबनम की पैरवी करने वाली अधिवक्ता नकवी का कहना है कि सिर्फ महिला होने के नाते वह शबनम को फांसी की सजा से बचाना चाहती हैं।