पति ने घर से निकाला, म‍िला हक, महिला बन गई बागपत की बेमिसाल नारी


बागपत। घर से निकाली गई संगीता पांच दिन तक इंतजार करती रही कि कब उसका पति वापस घर बुलाकर उसका सम्मान लौटाए लेक‍िन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी समझौते का प्रयास किया, लेकिन संगीता के पति का दिल नहीं पसीजा। संगीता को उसका अधिकार दिलाने के लिए सैकड़ों की संख्या में घर पहुंची महिलाओं ने घर का ताला तोड़ द‍िया। उन्‍होंने संगीता को उसका अधिकार ही नहीं दिया है बल्कि उसकी दुकान खुलवा कर सम्मान भी लौटाया द‍िया। महिलाओं के इस कार्य की जिला स्तर के अधिकारियों ने तारीफ की और इन्हें बागपत की बेमिसाल नारी से नवाजा है।
जानकारी के मुताब‍िक, मामला 15 दिन पहले का है। बागपत जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दक्षिण दिशा में बसा छोटा सा गांव है नंगला बडी। यहां हरीजन बस्ती में रहने वाली संगीता को उसके पति ने 15 दिन पहले मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया था और ताला लगा दिया। संगीता बेसहाय होकर गोठरा गांव निवासी समूह सखी कविता के पास पहुंची। कविता ने संगीता को अपने घर में आश्रय दिया और उसके पति को कई बार समझाने की कोश‍िश की। पति के न समझने पर कविता ने समूह सखी से जुड़ी सभी महिलाओं की एक बैठक की। इसमें फैसला लिया गया कि संगीता को उसका हक दिलाया जाए।
संगीता की दुकान खुलवा की मदद
कविता बताती हैं कि समूह सखी की सैकड़ों की संख्या में महि‍लाएं एकत्र होकर संगीता के घर पहुंची तो संगीता का पति घर छोड़कर वहां से भाग निकाला। इसके बाद महिलाओं ने संगीता के पति के लगाए गए ताले को हटाकर संगीता को घर में प्रवेश कराया। इसकी सूचना पुलिस को भी दे दी गयी। 10 दिन से संगीता अपने घर पर रह रही है। मंगलवार को समूह सखी की महिलाओं ने मिलकर अब संगीता को एक महिला सौंदर्य से जुड़े सामान की दुकान खुलवा कर उसको समाज में खड़े होने की राह दिखाई है।