दिल्ली पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा, असली कैंडिडेट की जगह दूसरे दे रहे टेस्ट


दिल्ली ब्यूरो। लिखित परीक्षा की तरह दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल भर्ती के फिजिकल टेस्ट में भी फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। वजीराबाद स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में चल रहे फिजिकल एंडयोरेंस और मेजरमेंट टेस्ट में अब तक 10 ऐसे युवकों की पोल खुल चुकी है, जो दूसरों की जगह टेस्ट देने पहुंचे थे। पिछले साल हुए कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के बाद 67,740 कैंडिडेट्स को फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया है। यह टेस्ट 27 जुलाई तक चलना है। आशंका है कि अगले कुछ दिन में फर्जीवाड़ा करने वालों की तादाद बढ़ सकती है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल पुलिस अफसर बारीकी से दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
पुलिस अफसरों ने बताया कि भर्ती के लिए चल रहे फिजिकल टेस्ट के दौरान एसएससी की वेबसाइट पर अप्लिकेशन के साथ अपलोड फोटो को फिजिकल टेस्ट टिकट पर लगी फोटो से मिलाया जा रहा है। इसी स्क्रूटिनी के दौरान 9 जुलाई को फर्जीवाड़े के 9 केस सामने आए हैं। शुरुआती जांच में दो केसों में लग रहा है रिटन टेस्ट में असली कैंडिडेट बैठा था, लेकिन फिजिकल टेस्ट के लिए दूसरे को भेज दिया। इन केसों में दोनों युवक हरियाणा के हैं। सोनीपत के गन्नौर के रहने वाले मोनू के बदले सोनीपत का रोहित आया था तो सोनीपत के दीपक के बदले सचिन फिजिकल टेस्ट देने पहुंचा था।
अफसरों ने बताया कि बाकी सात केसों में लग रहा है कि फिजिकल टेस्ट देने आया कैंडिडेट असली है, लेकिन रिटन टेस्ट में दूसरे को बिठाया गया होगा। इन मामलों में राजस्थान के दौसा के रिंकू कुमार मीना, यूपी के हाथरस के अरविंद कुमार, यूपी फिरोजाबाद के हरप्रसाद सिंह, फिरोजाबाद के ही राजीव कुमार, फिरोजाबाद के ही अनिल कुमार, आगरा के सत्यवीर और राजस्थान के भरतपुर के रिंकू कुमार को भी फोटो मिसमैच होने पर पकड़ा गया। पुलिस को शक है कि इन सात फर्जीवाड़े में सॉल्वर गैंग शामिल हो सकता है, क्योंकि रिटन टेस्ट में फर्जी कैंडिडेट बैठा था। फिजिकल टेस्ट में फर्जीवाड़े का पहला केस 2 जुलाई को सामने आया था। भिवानी के हिमांशु ताखर की जगह टेस्ट देने पहुंचे प्रदीप को पकड़ा गया था।
क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर हो सकते हैं केस
दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल के 5846 पोस्ट के लिए भर्ती चल रही है। स्टाफ सिलेक्शन कमिशन के जरिए पिछले साल रिटन टेस्ट हुआ था। इस दौरान सॉल्वर गैंग पकड़ा गया था। कई ऐसे युवक पकड़े गए, जो दूसरे की जगह एग्जाम दे रहे थे। इनसे पूछताछ में खुलासा हुआ था कि सॉल्वर गैंग रिटन एग्जाम में पास करवाने के लिए 8 से 35 लाख रुपये तक वसूल रहा था। फिजिकल टेस्ट के फर्जीवाड़े में सभी 10 मामलों में सोनिया विहार थाने में जालसाजी का केस दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस अफसरों ने बताया कि मामला पेचीदा होने की वजह ये सभी केस जल्द क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो सकते हैं।