आगरा में जलती चिता पर पानी डाल पुलिस ने निकाला शव


 सांकेतिक तस्वीर

आगरा। मार्केट में 50 लाख रुपये से ज्यादा की रकम डूबने पर आगरा के दवा व्यापारी ने खुदकुशी कर ली। बल्केश्वर घाट पर मंगलवार की सुबह अंतिम संस्कार के दौरान पहुंची पुलिस ने जलती चिता पर पानी डालकर व्यापारी का शव निकाला। मीडिया में वायरल हुए सुसाइड नोट में व्यापारी ने लोगों पर अपनी बकाया रकम का ब्यौरा दिया है। पुलिस ने बताया कि सुबह सूचना मिली कि दवा व्यापाारी रविकांत गुप्ता की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। परिजन उसका अंतिम संस्कार रहे हैं। इस पर थाने की फोर्स बल्केश्वर श्मशान घाट पर पहुंची। व्यापारी का शव चिता से बरामद कर लिया। हालांकि स्वजन ने किसी तरह की पुलिस कार्रवाई से इनकार किया। कमला नगर के ब्रज विहार में रहने वाले दवा व्यापारी के बड़े भाई विष्णु कांत गुप्ता ने पुलिस को बताया कि रविकांत पत्नी चंचल गुप्ता और बेटे-बेटी के साथ राजकोट, गुजरात में रहते थे। वहां पर दवाओं की ट्रेडिंग का काम करते थे।
एक साल पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन में काम बंद होने पर वह परिवार समेत आगरा लौट आए। यहां कमला नगर के ए-ब्लॉक स्थित फूल वाटिका में किराए पर रह रहे थे। विष्णुकांत गुप्ता ने बताया कि रविकांत फव्वारा बाजार से थोक में दवाओं को खरीदकर उन्हें मेडिकल स्टोर और क्लीनिक पर देते थे। मगर, काम-धंधा ठीक नहीं चलने पर आर्थिक तंगी के चलते मानसिक तनाव में थे।
पति के बहुत देर तक न लौटने पर पत्नी की काल किसी राहगीर ने रिसीव की, उसने बताया जिसका फोन है, वह बल्केश्वर घाट पर बेहोशी की हालत में पड़ा हुआ है। उसके मुंह से झाग निकल रहा है। इस पर पत्नी और स्वजन मौके पर पहुंचे। व्यापारी को कमला नगर के अस्पताल में लेकर गए। वहां से एसएन इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्वजन मंगलवार की सुबह शव का अंतिम संस्कार करने आए थे। इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा ने बताया कि फिलहाल किसी के खिलाफ तहरीर नहीं दी है।
दवा व्यापारी ने सुसाइड नोट में विस्तार से लिखा है कि किस पर कितनी रकम बकाया है। एक व्यापारी पर 50 लाख जबकि दूसरे पर 14 लाख रुपये बकाया बताए हैं। आगरा, राजकोट, पोरबंदर आदि जिलों के व्यापारी हैं। जिन दो व्यापारियों पर अपनी रकम बकाया बताई है, लिखा है कि उनके कारण ही मर रहा हूं। मेरे मरने के बाद यह रकम मेरी पत्नी को दिला देना। सुसाइड नोट में रविकांत गुप्ता ने पत्नी चंचल और भाइयों को लिखा है कि वह उसे माफ कर दें। पत्नी चंचल को लिखा है कि मेरे मरने के बाद अपने घर भाई-भाभी के पास चली जाना। वह लोग बहुत अच्छे हैं, उसका और बच्चों दोनों का ख्याल रखेंगे। रविकांत ने लिखा है कि वह अपनी पुरानी जिंदगी नहीं भूल पा रहा है। इसीलिए वह जा रहा है।