गायब हो गए दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रसार निदेशालय के उपनिदेशक नलिन चौहान


नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रसार निदेशालय के उपनिदेशक नलिन चौहान को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए सात माह बीत चुके हैं। अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका है। इस बीच उनके परिवार पर मुसीबतें जारी हैं। परिवार को अपना सरकारी आवास 27 जून को खाली करना पड़ा है। नलिन चौहान को मिलने वाला वेतन भी अब बंद हो गया है। उनकी पत्नी अल्पना चौहान बच्चों व ससुर के साथ साकेत स्थित अपनी मां के घर पर रह रही हैं।
वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर किसी तरह से गुजर बसर करने को मजबूर हैं। अल्पना का आरोप है कि नलिन को तलाशने के संबंध पुलिस ने पूरा प्रयास नहीं किया। दिल्ली पुलिस को चाहिए कि चाहे जितने भी महीने या साल लगे, लेकिन नलिन की तलाश में वह पूरा जोर लगाएं। उन्होंने मायूसी जताते हुए कहा कि कोरोना के इस दौर में सरकार को हमारे दुखों में शामिल होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट उनसे सुविधाएं वापस ले ली गई।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 10 दिसंबर को नलिन चौहान सिविल लाइन स्थित अपने सरकारी आवास से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। उन्होंने अपना मोबाइल फोन घर पर छोड़ दिया था। इस मामले में उत्तरी जिला पुलिस की कई टीमें जांच कर रही हैं। पुलिस अब तक सैकड़ों लोगों से पूछताछ कर चुकी है। एक अधिकारी ने कहा कि हर स्तर पर उनका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
परिवार लगाए बैठा है आस
नलिन को गायब हुए सात माह हो गए हैं, लेकिन उनके परिवार ने आस नहीं छोड़ी है। परिवार हर स्तर नलिन का पता लगाने के लिए खोजबीन कर रहा है। पत्नी अल्पना लगातार संबंधित पुलिस थाने के चक्कर लगा जांच की प्रगति के बारे में पूछ रही हैं। उनके दोनों बच्चे व 77 वर्षीय पिता देवेश ¨सह नलिन को के लौट आने की आस लगाए हुए हैं।
परिवार का खर्च उठाने के लिए ट्यूशन पढ़ाने को मजबूर पत्नी
एक दौर था जब जिंदगी आसान थी और सामाजिक स्तर भी बेहतर था। न कमाने की चिंता और न ही आर्थिक तंगी का दूर-दूर तक कोई भान था। सरकारी आवास में जिंदगी चैन से गुजर रही थी, लेकिन दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रसार निदेशालय के उपनिदेशक पद पर कार्यरत पति नलिन चौहान के लापता होने के बाद से मुश्किलों का ऐसा पहाड़ टूटा कि जिंदगी पटरी से उतर गई। अब हर दिन जिंदगी जीने की जद्दोजहद में बच्चों व परिवार को पालने के लिए ट्यूशन पढ़ाना पड़ रहा है। नलिन चौहान को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए सात माह से ऊपर हो गए हैं। अब तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका है। इस बीच उनके परिवार पर मुसीबतों का दौर जारी है।
सरकारी आदेश के बाद परिवार को 27 जून को सरकारी आवास खाली करना पड़ा है। इसी तरह नलिन चौहान को मिलने वाला वेतन भी अब बंद कर दिया गया है। उनकी पत्नी अल्पना चौहान बच्चों व ससुर के साथ साकेत स्थित अपनी मां के घर पर रह रही हैं। वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर किसी तरह से गुजर बसर करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि नलिन को तलाशने में संबंध पुलिस ने पूरा प्रयास नहीं किया। दिल्ली पुलिस को चाहिए कि वह उनकी तलाश में पूरा जोर लगाएं।
उन्होंने मायूसी जताते हुए कहा कि कोरोना के इस दौर में सरकार को हमारे दुखों में शामिल होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट उनसे सुविधाएं वापस ले ली गई। छह माह का वेतन देने के बाद इस माह से सरकार ने वेतन देना बंद कर दिया गया है। बता दें कि लापता सरकारी कर्मी के मामले में छह माह तक वेतन व सुविधाएं देने का प्रविधान है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 10 दिसंबर को नलिन चौहान सिविल लाइन स्थित अपने सरकारी आवास से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। उन्होंने अपना मोबाइल फोन घर पर छोड़ दिया था। इस मामले में उत्तरी जिला पुलिस की कई टीमें जांच कर रही हैं। पुलिस अब तक सैकड़ों लोगों से पूछताछ कर चुकी है। एक अधिकारी ने कहा कि हर स्तर पर उनका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।