मजदूर का एक लाख रुपए से भरा बैग लौटाने वाले सिपाही को पुलिस कमिश्नर ने किया सम्मानित


  • दिल्ली पुलिस की रेलवे यूनिट में तैनात हैं नरेंद्र कुमार, कमिश्नर से मिला सम्मान
  • कॉन्स्टेबल नरेंद्र के काम को मिसाल की तरह हर कर्मचारी तक पहुंचाने के निर्देश
  • 21 साल सेना में नौकरी करने के बाद 2009 में पुलिस में शामिल हुए थे नरेंद्र
नई दिल्ली। पुलिस कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की रेलवे यूनिट में तैनात कॉन्स्टेबल नरेंद्र कुमार (55) को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र और 20 हजार रुपये का कैश रिवॉर्ड देकर सम्मानित किया। कमिश्नर ने कॉन्स्टेबल नरेंद्र के काम को सोशल मीडिया के जरिए एक मिसाल की तरह दिल्ली पुलिस की हर रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया। कॉन्स्टेबल नरेंद्र का कहना है कि उन्होंने ईनाम पाने के लिए वह काम नहीं किया था, बल्कि फर्ज समझकर किसी की मदद करने की सोच रखकर वह काम किया था।
2009 में दिल्ली पुलिस में भर्ती होने से पहले कॉन्स्टेबल नरेंद्र 21 साल सेना में नौकरी कर चुके हैं। कारगिल युद्ध के दौरान बटालिक सेक्टर में दुश्मन का सामना कर चुके नरेंद्र कुमार कारगिल के हीरो शहीद कैप्टन मनोज पांडे की रेजिमेंट में शामिल रह चुके हैं। उनका कहना है कि इतने साल आर्मी में नौकरी करने के बाद मुझे यही लगा कि अब मैं बिना वर्दी के कोई दूसरी नौकरी नहीं कर पाऊंगा। जब मेरा रिटायरमेंट करीब आया, तो मैंने अधिकारियों से अनुमति लेकर दिल्ली पुलिस की कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा दी और उसमें सफल होने के बाद पुलिस जॉइन कर ली। तीन साल से रेलवे यूनिट में तैनात कॉन्स्टेबल नरेंद्र के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। मूल रूप से यूपी के सहारनपुर के रहने वाले नरेंद्र कुमार पिछले हफ्ते उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने रेलवे स्टेशन पर छूटा एक शख्स का बैग वापस लौटाने में अहम भूमिका निभाई। बैग में एक लाख रुपये थे।


बैग, यूपी के खुर्जा के रहने वाले मजदूर विजय कुमार का था। विजय ने रकम इकट्ठा की थी, ताकि गांव में वह घर की छत को ठीक करवा सकें। बुधवार शाम जब वह शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन से दिल्ली-बरेली इंटरसिटी में सवार हो रहे थे, उसी दौरान जल्दबाजी में अपना एक बैग स्टेशन पर ही भूल गए थे। पैसे उसी बैग में रखे थे। वह बैग कॉन्स्टेबल नरेंद्र के हाथ लग गया। नरेंद्र ने बैग में रखी बैंक की पासबुक पर लिखे नंबर के जरिए विजय कुमार से संपर्क करके उन्हें वापस बुलाया और वेरिफिकेशन करने के बाद उनका बैग और उसमें रखे पैसे लौटा दिए। जब सीनियर अफसरों को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने भी नरेंद्र के काम की तारीफ की। पुलिस कमिश्नर ने भी एक ट्वीट कर कहा, 'मैं अपनी टीम से इसी तरह के काम की उम्मीद करता हूं। बीट ऑफिसर नरेंद्र, मुझे आप पर गर्व है।