लोन दिलाने के नाम पर फिल्म निर्माता-निर्देशक करता था ठगी, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार


नई दिल्ली। दक्षिण जिले की मैदानगढ़ी थाना पुलिस ने बॉलीवुड फिल्म निर्माता-निर्देशक अजय यादव(55) को मथुरा, यूपी से गिरफ्तार किया है। आरोपी अजय यादव मात्र दस प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर लोन दिलाने के नाम पर ठगी करता था। वह ठगी की रकम से फिल्में बनाता था। आरोपी छह फिल्में बना चुका है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व मुंबई क्राइम ब्रांच पहले भी उसे गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी अजय यादव संजय अग्रवाल, राकेश शर्मा, रमन, अविनाश समेत कई अलग-अलग नामों से ठगी की घटनाओं को अंजाम देता था। 
दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर के अनुसार सतबड़ी निवासी राहुल नाथ ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी ओखला औद्योगिक क्षेत्र में वैल्यू मेकर इंटरनेशनल प्राइवेट लि. नाम से कंपनी है। उन्हें अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए 65 करोड़ रुपये के लोन की जरूरत थी। अखबार में एक विज्ञापन के जरिए उनकी मुलाकात सेरेने फिल्म्स के मालिक अजय यादव से हुई। उसने राहुल नाथ के लिए 65 करोड़ का लोन दस वर्ष के लिए 10 प्रतिशत सालाना ब्याज पर दिलाने का झांसा दिया। 
अजय यादव ने लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज आदि तैयार करने के लिए 18 लाख अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। आरोपी ने राहुल से कुल 32 लाख रुपये ले लिए थे। पैसे लेने के बाद आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया। राहुल नाथ की शिकायत पर मामला दर्जकर मैदानगढ़ी थानाध्यक्ष जतन सिंह की देखरेख में एसआई उमेश यादव व हवलदार पंकज की टीम ने जांच शुरू की। जांच में ये बात सामने आई कि आरोपी संजय अग्रवाल, राकेश शर्मा, विकास कुमार, गुड्डू, रमन और अविनाश के नाम से ठगी कर रहा है।  
जांच में पता लगा कि अजय यादव ने हाल ही में साक्षी नाम की फिल्म बनाई है। पुलिस टीम ने मुबंई में फिल्म से जुडे लोगों से जानकारी जुटाई। यहां से पता लगा कि आरोपी इंदौर, मध्यप्रदेश में है। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी यहां से फरार हो गया। पुलिस टीम ने मोबाइल सर्विलांस के आधार पर आरोपी को मथुरा, यूपी के होली चौक स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अजय यादव के खिलाफ दिल्ली, मध्यप्रदेश व मुंबई में 13 मामले दर्ज हैं।  
ठगी की रकम से बनाता था फिल्में
डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि आरोपी ठगी की रकम से फिल्में बनाता था। उसने कुल छह बॉलीवुड फिल्म भड़ास, ओवरटाइम, लव फिर कभी, रन बांका, सस्पेंस और साक्षी बनाई। मगर इनमें एक भी फिल्म नहीं चली। इस कारण इसे काफी घाटा हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसा ये वर्ष 1986 में पहली बार दिल्ली आया था और दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलश में फाइनेंसियल कंसल्टेंसी खोली था। फिर इसने लोगों के पैसे शेयर मार्केट में लगाने शुरू दिए और लोगों को फर्जी शेयर जारी किए। अजय यादव के खिलाफ पहला मामला ग्रेटर कैलाश थाने में दर्ज हुआ था। 
पुलिस की जांच में पता लगा है कि आरोपी कई व्यवसायियों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपी पीड़ित को लोन का फर्जी डिमांड ड्राफ्ट दे देता था। इससे पीड़ित को लगता था कि उसे लोन मिल गया है। वह वर्ष 2015 से फरार था।