कोर्ट रूम में राष्ट्रीय ध्वज और न्याय की मूर्ति लगाने की मांग याचिका पर सुनवाई से इनकार


नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अदालतों के मुख्य गेट के साथ कोर्ट रूम में राष्ट्रीय ध्वज, राज्य का प्रतीक और न्याय की मूर्ति लगाने के लिए विचार करने का निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे याचिका पर सुनवाई में कोई रुचि नहीं रखते। याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं है। पीठ के रवैये को देख याची ने इसे वापस ले लिया व अदालत ने उसका निपटारा कर दिया।
याचिकाकर्ता राजकिशोर प्रसाद कुशवाहा व श्रीकांत प्रसाद ने तर्क रखा है कि कोर्ट रूम में भारतीय झंडे और न्याय की मूर्ति रखने से कोर्ट रूम के सभी संबंधित पक्षों के मन में और अपराधियों के मन में उत्साह पैदा होगा जो व्यक्तियों के आपराधिक व्यवहार को बदल सकता है और उन्हें बदल सकता है।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज का उद्देश्य उस देश की पहचान को प्रदर्शित करना है जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा देते हैं। उनके विशिष्ट डिजाइन और रंग प्रत्येक राष्ट्र के विशेष चरित्र का प्रतीक हैं और देश के अलग अस्तित्व की घोषणा करते हैं। यह सभी राष्ट्रों के लिए वास्तव में राष्ट्रीय ध्वज का बहुत महत्व है।
याची ने कहा अदालत साहस, आत्मविश्वास और अपराधों में कमी के पहलू में आग्रह पर विचार कर सकती है क्योंकि न्याय की मूर्ति भ्रष्टाचार, पक्षपात, लालच या पूर्वाग्रह के बिना कानून के निष्पक्ष और समान प्रशासन का प्रतीक है।
याचिका में प्रमुख विकसित देशों जैसे यूएसए, यूके, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली, ब्राजील, स्विटजरलैंड आदि का हवाला देते हुए कहा गया है कि उनके राष्ट्र का ध्वज, न्याय की देवी की मूर्ति और राष्ट्रीय प्रतीक समान रूप से रखे जाते हैं। न्यायाधीश के दोनों और उनके राष्ट्रीय झंडे, मेज पर न्याय की देवी की मूर्ति, पीछे सत्यमेव जयते की मूर्ति भी रखी जाती है, तो यह सब बातें लोगों के मन को जगाएंगी और यह अपराध करने की दिशा में भी काम करेगी। कोर्ट में भी ऊर्जा भी आएगी।
याची ने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सामने के लॉन में माँ और बच्चे की मूर्ति 28 जनवरी, 1950 में लगाई गई थी। वहां बच्चे को एक खुली किताब पकड़े हुए देखा जाता है, जिसमें कानून और न्याय का प्रतिनिधित्व करने वाले तौल संतुलन का प्रतीक है। इमारत को न्याय के तराजू की छवि पेश करने के लिए आकार दिया गया है। इमारत का केंद्रीय पंख तराजू का केंद्र बीम है लेकिन यह आकार में बहुत छोटा है जो आम आदमी को दिखाई नहीं देता है।

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