मथुरा के जवाहर बाग कांड के मृतक मुख्य आरोपी के परिवार के वकील का दावा, नहीं मारा गया रामवृक्ष


  • 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा के बाद लोगों की रूह को झकझोर कर रख दिया था
  • आज भी जवाहर बाग़ हिंसा की एक एक तस्वीर लोगों के जेहन में बनी हुई है
  • उपद्रवियों द्वारा पुलिस पर हमला किया था, जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ दिया था
  • इस हिंसा में 27 उपद्रवियों और दो पुलिस अधिकारियों सहित 29 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुए जवाहर बाग कांड को भले ही 5 साल का वक्त बीत गया हो, लेकिन आज भी लोगों के मन में रामवृक्ष के जिंदा या मुर्दा होने का सवाल लोगों के जस के तस बना हुआ है। आज तक यह पता नहीं चल पाया है कि रामवृक्ष अगर जिंदा है तो वह कहां है और किस हाल में है? रामवृक्ष मुर्दा है, तो उसके परिवार के सदस्यों ने रामवृक्ष के शव को लेने से क्यों मना कर दिया था।
वकील का दावा आज भी जिंदा है रामवृक्ष
वहीं, आरोपी पक्ष के वकील का यह दावा है कि पुलिस ने निवर्तमान सरकार के दबाव के चलते रामवृक्ष को मारने की वजह भगा दिया था। वकील का दावा है कि आज भी रामवृक्ष जिंदा है। वहीं आरोपी पक्ष के वकील का यह भी कहना है कि कई महीने बीत जाने के बाद भी रामवृक्ष के शव से लिए गए डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल की रिपोर्ट आज तक कोर्ट में पुलिस पेश नहीं कर पाई है।
कोर्ट में साक्ष्य नहीं पेश कर पाई पुलिस
2 जून 2016 को जिले के जवाहर बाग में हुई हिंसा के बाद लोगों की रूह को झकझोर कर रख दिया था। आज भी जवाहर बाग़ हिंसा की एक एक तस्वीर लोगों के जेहन में बनी हुई है। उपद्रवियों द्वारा पुलिस पर हमला किया था। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ दिया था। वहीं इस हिंसा में 27 उपद्रवियों और दो पुलिस अधिकारियों सहित 29 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
जवाहर बाग हिंसा के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत को लेकर आज भी लोगों के मन में सवाल पैदा होते हैं। यह आज तक साबित नहीं हो पाया है कि रामवृक्ष जिंदा है या मुर्दा। जवाहर बाग के मुख्य आरोपी मृतक रामवृक्ष यादव के परिवार के वकील एलके गौतम का यह दावा है कि रामवृक्ष आज भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि अगर रामवृक्ष मारा गया है, तो पुलिस प्रशासन और सीबीआई उसका प्रमाण कोर्ट में क्यों नहीं दाखिल कर पा रही है।
डीएनए रिपोर्ट खोल सकती है पोल
वकील ने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान डीएनए टेस्ट के लिए जो ब्लड सैंपल कलेक्ट किया गया था उसकी आज तक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं हुई है। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि पुलिस जानबूझकर डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं कर रही है। क्योंकि रामवृक्ष की बॉडी वह थी ही नहीं। इसलिये डीएनए का सैंपल मैच नहीं हो रहा है। पुलिस अगर रिपोर्ट को दाखिल करती है तो सारा भेद खुल कर सामने आ जाएगा।
100 में से 70 लोग हो चुके हैं रिहा
आरोपी पक्ष के वकील एलके गौतम का कहना है कि रामवृक्ष यादव का वह शव नहीं था और यही वजह थी कि परिवार के लोगों ने वह शव लेने से मना किया था। राजनीतिक दबाव के कारण रामवृक्ष को पुलिस के द्वारा भगा दिया गया। अधिवक्ता ने आगे बताते हुए कहा कि मई 2017 में हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार सीबीआई के द्वारा विवेचना शुरू की गई। सीबीआई के द्वारा कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 4 लोगों की जेल में मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति के द्वारा जमानत अर्जी लगाई गई। जमानत मिलने के बाद उस व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सीबीआई के द्वारा आरोप पत्र दाखिल ना करने की वजह से 100 में से 70 लोगों को रिहा किया जा चुका है।