मनोकामना पूर्ति के साथ मुड़िया बाबा करते हैं भक्तो का उद्धार


देवब्रत त्रिपाठी,(फतेहपुर ब्यूरो)। जनपद फतेहपुर के औरेई ग्राम में शिव का अति प्राचीन आदि मंदिर पातालेश्वर धाम मुड़िया बाबा स्थापित है जहाँ श्रावण मास में भक्तो द्वारा जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिव मंदिर का इतिहास आजादी के समय का है। पहले यह शिवलिंग एक खुले चबूतरे में स्थापित था। जनपद फतेहपुर के सेमौरी ग्राम के स्वतंत्रता सेनानी, जमींदार पंडित महाबीर त्रिपाठी ने इस मंदिर का मनोकामना पूर्ण होने पर निर्माण कराया था और एक भव्य मंदिर का रूप दिया था और मंदिर के नाम काफी जमीन दान की थी।
कथा ये है कि सेमौरी निवासी पंडित महाबीर त्रिपाठी एक बड़े मुकदमे में विजयी होने और मनोकामना पूर्ति के उपरांत उन्होंने शिव लिंग को औरेई से अपने ग्राम सभा सेमौरी मे स्थापित कराने के लिए मजदूरों द्वारा खुदाई शुरू कराई। खुदाई करते करते रात्रि हो गईं। बताते है कि साक्षात शिव स्वप्न में आकर महाबीर से कहते है कि मेरी शिव लिंग की जड़ काशी तक है यदि वहाँ तक खुदा सको तो ले जाओ अन्यथा यही मंदिर का निर्माण कराओ। दूसरे दिन प्रातः पंडित महाबीर त्रिपाठी के आदेशानुसार कारीगरों और मजदूरों द्वारा भव्य शिव मंदिर की स्थापना हुई साथ ही बड़े विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा, पूजा, अनुष्ठान आदि सम्पन्न कराया गया। 
एक कथा ये है कि जनपद में शिव के बारह भाग अर्थात बारह सिद्ध मंदिर है जिनमे सदर के ताम्बेश्वर, बुधरामउ के जागेश्वर, कीर्तिखेड़ा के थवाईश्वर, मझिलगांव के कुण्डेश्वर, औरेई के पातालेश्वर, चाँदपुर के गूढ़ेश्वर, बकेवर के किलेश्वर, बिंदकी के डूडेश्वर, दरौटा के सिद्धेश्वर, अर्गल के अँरगलेश्वर, जहानाबाद के राजेश्वर, और रामतलाई के कालेश्वर इन्हें द्वापर काल से जोड़कर देखा जाता है। बुजुर्ग बताते हैं कि शिव का केंद्र बिंदु खजुहा है जहाँ त्रेता में 11000 शिव लिंगो की स्थापना हुई थी जिनमे हजारों शिव लिंग के प्रमाण आज भी मौजूद हैं। सिद्ध शिव लिंगो में मझिलगांव स्थित कुण्डेश्वर में शिव की प्रिय औषधीय वनस्पति रुद्रवंती पाई जाती है जोकि पूरे विश्व मे कश्मीर के बाद दूसरा एक मात्र स्थान है। सावन में शिव भक्तों का मंदिर में तांता लगा रहता है और अधिकतर भक्त अपने वाहन में मुड़िया बाबा सदा सहाय लिखाते हैं। महिमा इतनी है कि अभी तक किसी की झोली खाली नही गई बाबा सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। कोरोना काल मे मुड़िया बाबा मंदिर में लगातार रामायण का पाठ चलता रहा है।पातालेश्वर धाम को मुड़िया बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली।