एम्स के आई सेंटर में करोड़ों का भ्रष्टाचार, दो स्टाफ सस्पेंड


नई दिल्ली। एम्स में एक बार फिर करप्शन का एक मामला सामने आया है। यह मामला एम्स के राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर (आरपी सेंटर) का है। मामले की शुरुआती जांच में दो स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले को इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को रेफर कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। दबी जुबान से एम्स प्रशासन ने इसकी पुष्टि तो की है, लेकिन बोलने से बच रहा है। यहां बता दें कि कुछ साल पहले एम्स ट्रॉमा सेंटर में भी भ्रष्टाचार से जुड़ा इसी तरह का एक मामला सामने आया था।
आरपी सेंटर के जनरल स्टोर से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार आरपी सेंटर के जनरल स्टोर से जुड़ा यह मामला है। मेडिकल सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप है। सूत्रों की मानें तो लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। इसे लेकर विभाग ने ऑडिट भी कराया था और जब इसका खुलासा हुआ तो एम्स प्रशासन ने भी जांच शुरू की। 19 अगस्त को ही यहां काम करने वाले दो स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य स्टाफ के ट्रांसफर भी किया गया है।
तीन सीनियर अफसरों की एक जांच कमिटी बनाई
इस मामले में 18 अगस्त को एम्स प्रशासन ने तीन सीनियर अफसरों की एक जांच कमिटी बनाई। इसके अगले दिन 19 नवंबर को इस मामले के प्राइम सस्पेक्ट दो लोगों को सस्पेंड कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग में मामले को रेफर कर दिया है और इस मामले में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है।
ट्रॉमा सेंटर के सामान खरीद में हुआ था भ्रष्टाचार
सूत्रों का कहना है कि इतना बड़ा घपला किसी दो स्टाफ के बस की बात नहीं हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि यह घपला लंबे समय से चल रहा था और इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं। लेकिन, दूसरी ओर यह भी है कि एम्स में इस तरह का मामला कोई नया नहीं है। पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब एम्स ट्रॉमा सेंटर में सामान खरीद को लेकर भ्रष्टाचार हुआ था। लेकिन, तत्कालीन सीवीओ संजीव चतुर्वेदी के ट्रांसफर के बाद मामला ठंडा पड़ गया।