गाजियाबाद साइबर सेल द्वारा लोगों से ऑनलाइन गेम के नाम पर करोडों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा,7 गिरफ्तार


गाजियाबाद ब्यूरो। साइबर सेल ने दुबई से चल रहे आनलाइन गेमिग नेटवर्क का पर्दाफाश कर सात जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इनमें दुबई में बैठे पानीपत के मूल निवासी बजिदर और उसका सगा भाई सुमित कुमार भी शामिल है। दावा है कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क अकेले भारत में ही 500 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। इस गिरोह के पीछे मुंबई, अंबाला और बड़ौदा की पुलिस भी लगी थी।
एसपी सिटी प्रथम निपुण अग्रवाल ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपित हरियाणा व पंजाब के रहने वाले हैं। बजिदर दुबई में प्लेसमेंट एजेंसी के साथ यह नेटवर्क भी चला रहा है। आशंका है कि वह मानव तस्करी में भी लिप्त है। उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पुलिस ने कर ली है। सीओ साइबर सेल अभय कुमार मिश्र ने बताया कि लोगों को बल्क मैसेज से लिक भेजकर एप डाउनलोड कराते और फिर लाग-इन के बाद वालेट बन जाता है। इसमें पैसे जमा करा लूडो, तीन पत्ती, रमी, फुटबाल व क्रिकेट समेत कोई भी गेम खेल सकते हैं। दस रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की प्रतियोगिता होती हैं। छोटी रकम जीतने तक पैसे निकालने का विकल्प खुला रहता। 40-50 हजार रुपये जीतने पर विड्राल (निकासी) का विकल्प ब्लाक कर देते थे।
नौकरी का भी देते थे झांसा साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि तीन अलग-अलग लिक का पता चला है। दो में राइजिग स्टार और बेट33 एप की एपीके फाइल डाउनलोड होती है और एक पर क्लिक करते ही राइजिग स्टार का वाट्सएप ग्रुप ज्वाइन हो जाता है। दो लिक ब्लाक हो गए हैं और राइजिग स्टार एप अभी भी डाउनलोड हो रहा है। वाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने पर पहले पार्ट टाइम जाब का भी आफर दिया जाता है। भारत में इनके 70 से अधिक बैंक खातों का पता चला है, जिनमें से 23 खाते फ्रीज करा दिए हैं। 16 खातों में 70 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। इन खातों में 56 लाख रुपये अभी भी हैं। टिफर इंफोटेक फर्म के चालू खाते में सबसे ज्यादा 20 करोड़ और यूथिकिग टेक के खाते में 12 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे।
बजिदर दुबई में बैठा है। भारत में सुभाष उसके दाएं हाथ की भूमिका निभा रहा था। बाकी सभी का काम फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी नंबर हासिल करना और इसके आधार पर चालू बैंक खाता खुलवाना था। हर खाते के लिए चार लाख रुपये एकमुश्त और खाता फ्रीज होने तक पांच हजार रुपये रोजाना मिलते थे। सुभाष सभी खातों की पासबुक व चेकबुक अपने पास रखता था और नेटबैंकिग का लाग-इन पासवर्ड बजिदर को भेज दिया जाता था।