बुलंदशहर फर्जी एनकाउंटर मामले में कोर्ट ने कसा शिकंजा, 8 पुलिसकर्मी दोषी करार, गिरफ्तारी का वारंट जारी


बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में छात्र के फर्जी एनकाउंटर मामले में शामिल तत्काल पुलिसकर्मियों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। न्यायालय ने फर्जी एनकाउंटर में 8 पुलिसकर्मियों को दोषी माना। साथ ही रिटायर सीओ समेत पुलिसकर्मियों के गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार 2002 में सिकंदराबाद बुलंदशहर मार्ग पर बिलसुरी के पास बदमाशों ने रोडवेज बस में लूटपाट की थी। इसके विरोध करने पर रोडवेज बस परिचालक को गोली मारकर घायल कर दिया था।
पुलिस ने बस की घेराबंदी कर कथित तौर पर एक बदमाश को मुठभेड़ में मार गिराया। मृतक की पहचान सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव शहपानी निवासी प्रदीप पुत्र श्यामलाल के रूप में हुई थी। परिवार के मुताबिक प्रदीप एक छात्र था और गाजियाबाद से अपने कॉलेज फीस जमा करने के बाद बस में वापस लौट रहा था। मृतक के पिता श्यामलाल ने बेटे की हत्या के आरोप में मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए शासन को शिकायत की थी। उधर पीड़ित श्यामलाल ने बताया कि पूरा मामला उच्च न्यायालय चल रहा है, जिसमें अभी तक 6 पुलिसकर्मी कोर्ट में सरेंडर कर चुके हैं।
श्यामलाल ने कहा कि रिटायर सीओ और दरोगा अभी तक फरार चल रहे हैं। जिनसे मुझे अभी भी जान का खतरा बना हुआ है और अभी तक मेरे बेटे को इस पूरे मामले में न्याय नहीं मिला है। न्यायालय ने सभी पुलिसकर्मियों के वारंट जारी कर दिए थे लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने किसी भी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार नहीं किया। केवल 4 पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह जमानत पर भी बाहर आए हुए हैं। हाल ही में दो पुलिसकर्मियों ने भी कोर्ट में सरेंडर किया है। 19 साल से ज्यादा मुझे केस लड़ते लड़ते हो गया और अभी भी मुझे न्याय नहीं मिला है।