दिल्ली में 9 साल बाद फिर से एक होंगे तीनों नगर निगम, केंद्र ने मांगी जानकारी


  • फाइनेंशल बोझ को कम करने की प्लानिंग, केंद्र कर रही आकलन
  • तीनों एमसीडी से फाइनेंशल डिटेल्स के बारे में भी जानकारी मांगी
  • 9 साल पहले 2012 में तीनों एमसीडी का किया गया था विभाजन
नई दिल्ली। दिल्ली के तीनों नगर निगमों की खस्ताहाल माली हालत को देखते हुए फिर से इन्हें एक करने के विकल्प को खंगालने की तैयारी हो रही है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि केंद्र सरकार इसे लेकर कितनी गंभीर है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से हाल में केंद्र सरकार की ओर से नगर निगमों के बारे में जानकारियां मांगी गई हैं, उससे संकेत मिल रहा है कि इनके एकीकरण के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। अगर केंद्र सरकार ऐसा करती है, तो उसे कानून में बदलाव की कवायद करनी होगी। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में हाल तक मेयर रहे जयप्रकाश का भी कहना है कि उन्होंने भी कुछ महीने पहले उपराज्यपाल से तीनों नगर निगमों को एक करने की मांग की थी। एकीकृत एमसीडी के कमिश्नर रहे के.एस. मेहरा के अनुसार, एमसीडी में तमाम काम केंद्र के ऐक्ट के तहत होते हैं। केंद्र के पास यह अधिकार है कि जिस एक्ट के तहत एमसीडी को तीन भागों में बांटा गया है, उसे रद्द कर सके। केंद्र को इसमें न तो राज्य सरकार से सुझाव की जरूरत है और न ही एलजी की सिफारिश की।
2012 में चुनाव से पहले 3 भागों में बंटा था
बता दें कि लगभग 9 साल पहले तक दिल्ली में एक ही नगर निगम था, लेकिन 2012 के निगम चुनाव से पहले दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में विभाजित कर दिया गया। उस वक्त तर्क दिया गया था कि ऐसा करने से नगर निगम के कामकाज में सुधार लाया जा सकेगा और ये प्रभावी तरीके से जनता को सेवाएं दे सकेंगी। लेकिन नगर निगम को विभाजित करने के बाद से ही नगर निगमों के कामकाज में कोई खास सुधार तो नहीं हुआ, उलटे निगम वित्तीय संकट में इस कदर फंस गए कि कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो गया। जिसकी वजह से निगम कर्मचारियों को कई बार हड़ताल पर जाना पड़ा।
विभाजन के बाद वित्तीय स्तिथि बिगड़ी
एमसीडी अफसरों के अनुसार, साउथ एमसीडी को छोड़कर नॉर्थ व ईस्ट एमसीडी की वित्तीय स्थिति बेहद ही खराब है। मुख्य कारण एमसीडी का जोनल लेवल पर विभाजन है। जैसे साउथ एमसीडी एरिया में ज्यादातर ऐसे इलाके हैं, जिनका सर्कल रेट काफी अधिक है। सर्कल रेट अधिक होने से ही साउथ एमसीडी एरिया में प्रॉपर्टी टैक्स से रेवेन्यू भी अधिक आता है। ए और बी कैटिगरी के कॉलोनियां भी साउथ एमसीडी एरिया में हैं। नॉर्थ एमसीडी के किसी भी जोन में ए और बी कैटिगरी का कोई एरिया नहीं है। यहां सी, डी, ई, एफ, जी और एच कैटिगरी के ही एरिया हैं। इसी तरह से ईस्ट एमसीडी एरिया में भी है। दूसरा एमसीडी के बंटवारे के बाद तीन-तीन कमिश्नर, तीन-तीन मेयर, डिप्टी मेयर व जोनल चेयरमैन व कमिटियों के चेयरमैन तीन-तीन हैं। इनके ऑफिस या दूसरे कार्यों पर जो खर्च होता है, वह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
पिछले 9 साल में एमसीडी की स्तिथि का होगा आकलन
तीनों एमसीडी के यूनिफाइड होने पर सिर्फ एक मेयर, एक कमिश्नर और एक जोन के एक चेयरमैन पर ही खर्च होता था। यूनिफाइड से पहले भी नॉर्थ व ईस्ट एमसीडी के 8 जोन से रेवेन्यू कम आते थे। लेकिन, साउथ एमसीडी के चार जोन से जितना रेवेन्यू मिलता था, उससे घाटे की भरपाई हो जाती थी और एमसीडी के पास तब कोई अर्थिक तंगी नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि करीब 8-9 सालों बाद केंद्र ने इन सभी चीजों के आकलन के बाद यह मन बनाया है कि तीनों एमसीडी को फिर से एक कर दिया जाए। एमसीडी को यूनिफाइड करने के लिए कुछ साल पहले तीनों एमसीडी कमिश्नर्स से उनके सुझाव भी मांग गए थे। तब साउथ एमसीडी कमिश्नर को छोड़कर दोनों एमसीडी कमिश्नर ने एमसीडी को यूनिफाइड करने के पक्ष में बात कही थी।
केंद्र सरकार कर सकती है एमसीडी को यूनिफाइड
यूनिफाइड एमसीडी के कमिश्नर रहे के.एस. मेहरा के अनुसार, एमसीडी में जो भी काम होते हैं, वह सेंट्रल एक्ट के तहत होते हैं। केंद्र सरकार को यह पावर है कि जिस एक्ट के तहत एमसीडी को तीन भागों में विभाजित किया गया है, उसे रद्द कर सके। केंद्र को इसमें न तो स्टेट गवर्नमेंट से किसी तरह के सुझाव की जरूरत है और न ही उपराज्यपाल के अनुमोदन की। मेहरा का कहना है कि तीनों एमसीडी को यूनिफाइड करना ही एमसीडी के वित्तीय स्थिति में सुधार ला सकता है। नॉर्थ एमसीडी के पूर्व मेयर जयप्रकाश का कहना है कि उन्होंने कुछ महीने पहले तीनों एमसीडी को यूनिफाइड करने की मांग उपराज्यपाल से की थी, जिसपर केंद्र सरकार ने उनसे स्थितियों को अवगत कराने के लिए कहा था।