बुंदेलखंड में हो रहे पर्यावरण बदलाव पर वैज्ञानिकों ने शुरू की रिसर्च, हमीरपुर में कई जगहों की बनाई फिल्म


हमीरपुर। बुंदेलखंड के सातों जिलों में सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉरेस्ट के वैज्ञानिकों की टीम ने केंद्र सरकार के निर्देश पर मृदा संरक्षण, पौधारोपण एवं वानिकी के कार्यों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने रिसर्च के लिए जल और जंगल में ड्रोन कैमरे उड़ाए। साथ ही क्षेत्र की विरासत, ऐतिहासिक धरोहर और हस्तशिल्प की वीडियो फिल्म भी बनाई है।
बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर, ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, महोबा और जालौन जिलों में लगातार भूगर्भ जल नीचे सरक रहा है। सदियों पहले इन क्षेत्रों में वन सम्पदा के अपार भंडार थे, लेकिन समय के साथ पूरे इलाके में वन सम्पदाओं का क्षरण हो गया है। पिछले चार दशकों से पूरे क्षेत्र का पर्यावरण ही बदल गया है। अब इसके सुधार के लिए सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉरेस्ट के वैज्ञानिकों की टीम कैम्पा योजना के तहत बुंदेलखंड के सभी जिलों में रिसर्च कर रही है।
महाभारत काल की धरोहर की बनाई वीडियो फिल्म
वन विभाग हमीरपुर के उप प्रभागीय वनाधिकारी संजय शर्मा ने गुरुवार को बताया कि सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉरेस्ट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. इन्द्रदेव के नेतृत्व में एक टीम ने यहां राठ कस्बे में बारह खंभा और अन्य ऐतिहासिक धरोहर को बारीकी से देखा है। यह धरोहर महाभारत काल की है। इन स्थलों की वीडियो फिल्म बनाई गई है। जलालपुर क्षेत्र के भेड़ी गांव के पास बेतवा नदी किनारे बने घाटों का भी वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। यह स्थान अंग्रेजों के जमाने का है। जहां से नदी के जरिए विश्व व्यापार होता था।
मशहूर नागरा जूती उद्योग की बनाई लघु फिल्म
वैज्ञानिकों की टीम हमीरपुर जिले के सुमेरपुर कस्बे में संचालित नागरा जूती उद्योग पहुंचकर कारीगरों से मिली। यहां दर्जनों दुकानों में हाथों से बनाई जा रही नागरा जूती को देख टीम के अधिकारी हतप्रभ रह गए। पचास ग्राम से लेकर सत्तर ग्राम वजन की जूती बनाते देख टीम ने लघु फिल्म भी बनाई। इसके अलावा मौदहा कस्बे में चांदी की मछली बनाने वालों के यहां पहुंची टीम ने वीडियो शूट किया। हमीरपुर में यमुना बेतवा नदी के संगम स्थल पहुंचकर टीम ने अंग्रेजों के जमाने के रेलवे ब्रिज को कैमरे में कैद किया।
हजारों साल पुराने कल्पवृक्ष को टीम ने कैमरे में किया कैद
वन विभाग के उप वन प्रभागीय अधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों की चार सदस्यीय टीम ने हमीरपुर शहर में यमुना नदी किनारे हजारों साल पुराने कल्पवृक्ष का जायजा लिया। टीम ने कल्पवृक्ष को कैमरे में कैद किया है। वृक्ष की वास्तविक उम्र को लेकर भी टीम ने अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉरेस्ट के वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में कराए गए वन विभाग के कार्यों का मूल्यांकन करने के साथ यह अध्ययन किया है कि इन कार्यों का आम जन जीवन में कितना प्रभाव पड़ा है।