तिहाड़ जेल में चला सर्च अभियान, कैदियों से मिले चाकू, सुए और तंबाकू


दिल्ली ब्यूरो। तिहाड़ की जेल नंबर-3 में लगातार हो रही चाकूबाजी की वारदातों को देखते हुए जेल प्रशासन ने यहां तलाशी अभियान चलाया। तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के साथ मिलकर किए गए इस सर्च अभियान में बड़ी संख्या में लोहे की पत्तियों और सरियों से बनाए गए चाकू और सुए जैसे हथियार, तंबाकू, मोबाइल फोन और चार्जर आदि बरामद किए गए। यह सब कैदियों के पास से या फिर उनके छिपाने के ठिकानों से बरामद किए गए।
गौरतलब है कि मामले में मीडिया द्वारा तिहाड़ की जेल नंबर-3 में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मामले में लगातार रिपोर्टिंग करके खुलासा किया गया। जिसमें चाकूबाजी की घटनाओं, कैदियों द्वारा अपने सिर फोड़ लेने और लगातार तीन शनिवार को जेल में घटी घटनाओं के बारे में भी खुलासा किया गया। इन तमाम घटनाओं को देखते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन ने इस जेल में बड़े स्तर पर सर्च अभियान चलाया।
जिसमें कैदियों के पास से एक दर्जन से अधिक चाकू, तंबाकू, मोबाइल फोन और अन्य सामान मिला। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि सर्च अभियान में कैदियों के पास से 15 से अधिक चाकू और सुए जैसे हथियार बरामद किए गए। लेकिन जेल प्रशासन का कहना है कि यह सही है कि सर्च अभियान में कैदियों के पास से चाकू बरामद किए गए हैं। लेकिन इनकी संख्या 15 से कम है। दूसरे, जेल प्रशासन ने यह भी बताया कि इस सर्च अभियान में कैदियों से मोबाइल फोन नहीं मिला। हो सकता है कि कुछ फोन जेल में सड़क की ओर से फेंके जाने वाले मिले हों। क्योंकि तिहाड़ की कई जेलों में बाहर सड़क से अंदर जेल में मोबाइल फोन, चार्जर और तंबाकू जैसे प्रतिबंधित आइटम फेंके जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
इसमें कई बार जेल अधिकारी थ्रोइंग के इन मामलों को पकड़ने में कामयाब भी हो जाते हैं और कई बार यह सामान कैदियों तक भी पहुंच जाता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि टीएसपी को साथ लेकर इस तरह के सर्च अभियान की जरूरत तिहाड़ की ओर जेलों में भी है। जहां कैदी समय-समय पर मोबाइल फोन से ऑडियो या वीडियो वायरल करते रहते हैं। कुछ जेलों में तंबाकू भी मिला है। अगर ठीक से सर्च की जाएगी तो इस तरह का सारा प्रतिबंधित सामान बरामद हो जाएगा।
रोहिणी जेल में बंद रहे विचाराधीन कैदी सुकेश से दो मोबाइल फोन मिलने के मामले में तिहाड़ जेल प्रशासन ने अपने 9 अफसरों और वॉर्डर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने बताया कि इसमें एक सुपरिटेंडेंट, तीन डिप्टी सुपरिटेंडेंट, दो असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, एक हेड वॉर्डर और दो वॉर्डर शामिल हैं। इनमें से असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट तक के स्टाफ पर विभागीय जांच में कार्रवाई करने के तिहाड़ जेल के डीजी को अधिकार होता है। इससे ऊपर डिप्टी सुपरिटेंडेंट और सुपरिटेंडेंट के लिए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया राज्य के चीफ सेक्रेटरी द्वारा की जाती है। मामले में 6 स्टाफ को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। सुकेश के पास तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच पाए? इतने दिनों इसकी भनक जेल अफसरों और स्टाफ को कैसे नहीं लग सकी? इन तमाम मामलों में जेल अफसरों और निचले स्टाफ की लापरवाही मानते हुए इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। जांच पूरी होने के बाद इनके खिलाफ सस्पेंड होने से लेकर और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।