मेरठ में वीरता पदक से सम्मानित इंस्पेक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप, एसएसपी की टीम ने 'घूसखोर' इंस्पेक्टर का किया पर्दाफाश


मेरठ। मेरठ के थाना सदर बाजार में एक कांस्टेबल को पुलिस ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा और इसी मामले में थाने के थानाध्यक्ष विजेंद्र राणा को भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमे में आरोपी बनाया गया। एसएसपी के द्वारा बनाई गई टीम ने हेडकांस्टेबल को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष नदारद हो गए। सबूतों के आधार पर सदर बाजार थाने के हेड कांस्टेबल और इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप
आरोप है कि दोनों एक ट्रक चोरी के मुकदमे की विवेचना में पैसे वसूल रहे थे। पुलिस के अनुसार थाने के हेड कांस्टेबल और इंस्पेक्टर एक ट्रक की चोरी के मामले में पूछताछ के लिए खतौली से गिरफ्तार हुए वकार को छोड़ने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। 50 हजार की रकम पहले ही हेड कांस्टेबल को दी जा चुकी थी। बाकी रकम हेड कांस्टेबल को दी जानी थी। आरोपी ट्रक मालिक वकार ने पोस्ट ऑफिस के पास हेड कांस्टेबल मनमोहन को रकम देने के लिए बुलाया, तभी एसपी सिटी की टीम ने हेड कांस्टेबल को पैसों के साथ गिरफ्तार कर लिया। मनमोहन हेड कांस्टेबल को एसएसपी के सामने पेश किया गया जहां उसने थाना अध्यक्ष विजेंद्र राणा के कहने पर रुपए लेने की बात कही।
हेड कांस्टेबल और इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज
हेड कांस्टेबल ने बताया कि ट्रक स्वामी और चालक को छोड़ने के एवज में तीन लाख की रकम मांगी गई थी। एसएसपी ने जब इंस्पेक्टर विजेंद्र राणा की तलाशी लेने के आदेश दिए तो वही थानाध्यक्ष थाने से गायब हो गए और बताया गया कि वह किसी सरकारी कार्य से शहर से बाहर गए हैं। एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया की हेड कांस्टेबल मनमोहन और इंस्पेक्टर विजेंद्र राणा के विरुद्ध मुकदमा कायम कर लिया गया है।
15 अगस्त में डीजीपी ने दिया था वीरता पदक
आरोपी इंस्पेक्टर विजेंद्र राणा को गत 15 अगस्त को डीजीपी मुकुल गोयल ने वीरता पदक दिया था। थानाध्यक्ष विजेंद्र राणा ने थाने के बाहर पोस्टर भी लगवा रखा था, जिसमें लिखा गया था कि किसी भी भ्रष्टाचार में कोई पुलिसकर्मी अगर संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ शिकायत करें।