जशपुर में दिव्यांग से दुष्कर्म, नशे में धुत केयर टेकर और चौकीदार ने नाबालिगों के कपड़े फाड़े, नाली में फेंका


जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर में बीते दिनों दिव्यांग परीक्षण केंद्र में मूक बधिर नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र के अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। राज्य महिला आयोग ने कहा है कि वह इस पर कार्रवाई करेगा। इधर, इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जशपुर में दिव्यांग बच्चों के साथ 22 सितंबर की रात मारपीट और एक मूक-बधिर नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। यह मामला जशपुर के राजीव गांधी शिक्षा मिशन की ओर से संचालित समर्थ दिव्यांग केंद्र का है। दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र के दो कर्मचारियों ने ही इस अपराध को अंजाम दिया था। घटना के तीन दिन बाद मामले का खुलासा हुआ था।
जानकारी के मुताबिक घटना वाली रात हॉस्टल अधीक्षक वहां नहीं थे। प्रशिक्षण केंद्र के केयर टेकर राजेश राम और चौकीदार नरेंद्र भगत रात करीब 11 बजे शराब के नशे में धुत होकर केंद्र में पहुंचे। उन्होंने सो रहे बच्चों को जगा दिया और उनसे मारपीट शुरू कर दी। चौकीदार ने 15 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। कम से कम पांच बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए। कुछ बच्चों ने भागने की कोशिश की तो उन्हें उठाकर हॉस्टल कैंपस की नाली में फेंक दिया। हॉस्टल में मचे हंगामे के बीच महिला स्वीपर बीचबचाव करने आई तो आरोपियों ने उसे बाथरूम में बंद कर दिया। वह किसी तरह से बाहर निकली और फोन कर हॉस्टल अधीक्षक संजय राम को सूचना दी। अधीक्षक रात में ही केंद्र पहुंच गए और कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया।
हॉस्टल में एक भी शिक्षक ऐसा नहीं है जो साइन लैंग्वेज समझता हो। हॉस्टल अधीक्षक ने रात में ही साइन लैंग्वेज के शिक्षकों को बुलाया। बच्चों ने अपनी भाषा में केयर टेकर और चौकीदार को आरोपी बताया। अधीक्षक की सूचना पर विभाग ने केयर टेकर और चौकीदार को पद से हटा दिया है।
हॉस्टल में 22 बच्चे और 12 बच्चियां रहती हैं। इनमें से कोई भी बोल और सुन नहीं सकता है। जिला कलेक्टर ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। महिला अधिकारी के द्वारा जांच में एक मूक बधिर नाबालिग के साथ दुष्कर्म और 5 बच्चियों के साथ मारपीट की पुष्टि हुई है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश में ना तंत्र काम कर रहा है ना प्रशासन। इस राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं है। घटना सामने आने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय पीड़ित बच्चों से मुलाकात करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए भाजपा अलग से कमेटी का गठन करेगी। वहीं, कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिकारियों को समय-समय पर छात्रावास का निरीक्षण कर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए काम करना चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि बीजेपी शासन काल में ऐसे लोगों को पुरस्कृत किया जाता था। कांग्रेस सरकार आने पर घटना उजागर होने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई है।
इधर, घटना को लेकर राज्य महिला आयोग भी एक्शन में आ गया है। अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा है कि महिला आयोग इस पर कड़ी कार्रवाई करेगा।