कानपुर में छेड़छाड़ के आरोपी को ही महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी


कानपुर ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार महिला सुरक्षा को लेकर सख्त रवैया अपनाए हुए है। मुख्यमंत्री ने महिला संबंधी अपराधों को रोकने के लिए ‘मिशन शक्ति’ योजना की शुरुआत की थी, लेकिन उनके ही सरकार के अधिकारी प्रदेश सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। 
आजम खान के करीबी छेड़छाड़ के आरोपी
डीपीओ जफर खान पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग मेहरबान है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने उप निदेशक रूप में मंगलवार को जफर खान को मिशन शक्ति का इंचार्ज बना दिया गया। कानपुर में डीपीओ रहे जफर खान का विवादों से पुराना नाता रहा है। समाजवादी सरकार में आजम खान के करीबी रहे डीपीओ जफर खान ने विभाग में जमकर मनमानी की। डीपीओ जफर खान पर अपनी सहकर्मी के साथ शोषण और छेड़छाड़ के आरोप हैं। जफर खान अलीगढ़ में तैनाती के दौरान एक महिला सहकर्मी ने शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद अलीगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने जमकर प्रदर्शन और हंगामा किया था। अलीगढ़ में विवाद बढ़ने के बाद जफर खान का ट्रांसफर कानपुर कर दिया गया था।
सीडीपीओ अनामिका सिंह ने लगाया था आरोप
कानपुर में भी डीपीओ जफर खान अपनी करतूतों को लेकर सुर्खियों में रहे। कानपुर विकास भवन में तैनात रहीं सीडीपीओ अनामिका सिंह ने डीपीओ जफर खान पर छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। सीडीपीओ अनामिका सिंह ने आरोप लगाया था कि बीते 18 मई 2020 को डीपीओ जफर खान अपने चैंबर में बुलाकर मेरा जबरन हाथ खींचा और अश्लील हरकत करने लगे। जफर खान पिछले ढाई साल से मुझे प्रताड़ित कर रहे थे। डीपीओ जफर खान ने मुझे चपरासी तरुण द्वारा अपने चैंबर में बुलवाया था। मैंने डीपीओ को कुछ प्रार्थनपत्र दिए। जिसमें इंक्रीमेंट लेटर, गोपनीय आख्या, डीपीओ द्वारा लगाए गए आरोपों के स्पष्टीकरण और मानदेय की कॉपी थी। डीपीओ ने मेरे द्वारा दिए गए प्रपत्रों को फाड़ दिया। इसके बाद मेरा हाथ पकड़कर खींचने लगे। जिसकी वजह से मेरे हाथ में चोट लग गई।
विशाखा कमेटी में पाए गए थे दोषी
सीडीपीओ अनामिका सिंह ने काकादेव थाने में डीपीओ जफर खान के खिलाफ तहरीर दी थी। योगी सरकार में डीपीओ की इतनी मजबूत पकड़ थी कि उसके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई थी। इस प्रकरण की जांच के लिए विशाखा कमेटी का गठन किया गया था। डीपीओ 25 दिनों तक कानपुर में ही रहकर सबूतों से छेड़छाड़ करता रहा। विशाखा कमेटी की जांच में डीपीओ जफर खान पर आरोप सच पाए गए थे, लेकिन इसके बाद भी विशाखा कमेटी की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सीडीपीओ अनामिका सिंह को 7 महीनों तक घर पर बैठाकर प्रताड़ित किया गया। जब अनामिका ने हार नहीं मानी तो उनका ट्रांसफर गोंडा कर दिया गया। वहीं, डीपीओ जफर खान को मुख्यालय से अटैच कर दिया। विभाग में मजबूत पकड़ होने के कारण मुख्यालय में बैठकर कानपुर में मनमानी करता रहा। सभी नियमों को ताख पर रखकर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने डीपीओ जफर खान को मिशन शक्ति का इंचार्ज बना दिया। इसके साथ ही पीड़िता को जफर खान को रिपोर्ट करने को कहा गया है।