टि्वन टावर को तोड़ना बड़ा चैलेंज, तरीका तलाशने पहुंची सीबीआरआई की टीम


नोएडा ब्यूरो। एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट में बनाए गए टि्वन टावर कैसे तोड़े जाएं यह देखने के लिए सोमवार को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीबीआरआई) की टीम नोएडा पहुंची। सीबीआरआई डायरेक्टर व डिप्टी डायरेक्टर ने नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ सेक्टर-93 ए में मौके पर पहुंच कर निर्माणाधीन टि्वन टावर का जायजा लिया। इसके बाद नोएडा अथॉरिटी पहुंच कर सीईओ, एसीईओ, प्लानिंग विभाग के अधिकारी व इंजीनियर्स के साथ एक बैठक की। जानकारी के मुताबिक, सीबीआरआई डायरेक्टर ने नोएडा अथॉरिटी से टि्वन टावर व उसके पास सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में बने दूसरे टावर की कंस्ट्रक्शन ड्राइंग मांगी हैं। ड्राइंग का अध्ययन कर 15 दिन में सुझाव देंगे कि टि्वन टावर कैसे तोड़े जाएं।
32 मंजिल तक बन चुके टि्वन टावर को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध मानते हुए तीन महीने के अंदर तोड़ने का आदेश दिया है। तोड़े जाने में आने वाला खर्च बिल्डर उठाएगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इसे तुड़वाने का काम नोएडा अथॉरिटी को करवाना है। टावर कैसे तोड़े जाएं इसके लिए अथॉरिटी ने कोर्ट के आदेश के मुताबिक सीबीआरआई से पिछले दिनों पत्र लिखकर सुझाव मांगा था। इस पर सीबीआरआई के डायरेक्टर एन गोपाल कृष्णन और डिप्टी डायरेक्टर सुवीर सिंह नोएडा पहुंचे थे। दोनों अधिकारी एमराल्ड कोर्ट में बने एपेक्स व सियान (टि्वन टावर) पर सुबह 10 बजे के बाद पहुंचे। वहीं पर पहले से अथॉरिटी के जीएम प्लानिंग व इंजीनियर्स की टीम मौजूद थी।
सीबीआरआई अधिकारियों ने पहले बाहर से दोनों टावर का निर्माण देखा। फिर अंदर जाकर एक मंजिल तक गए। यहां पर एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए के सदस्य भी टीम से मिले। आरडब्ल्यूए सदस्यों ने सीबीआरआई अधिकारियों से टि्वन टावर तोड़े जाने के दौरान आसपास के टावर और सोसायटियों की सुरक्षा को ध्यान में रखने का निवेदन किया। सीबीआरआई अधिकारियों ने कोर्ट का प्रकरण होने का हवाला देकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया, लेकिन अथॉरिटी सूत्रों की माने तो यह बात लगभग स्पष्ट हो गई है कि सीबीआरआई सुझाव देगी कि टावर कैसे तोड़े जाएं। इसके बाद तोड़ने के लिए कोई दूसरी एजेंसी अथॉरिटी को चुननी होगी।
एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट के टावर नंबर-16 और 17 तोड़े जाने हैं। इनका नक्शा अथॉरिटी से 40 मंजिल का पास हुआ था, लेकिन मौके पर 32 मंजिल तक ही निर्माण हो पाया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर निर्माण रुक गया था। अब यहां पर टावर नंबर-1 जो है जिसमें परिवार रह रहे हैं उसकी और टावर नंबर 17 के बीच की दूरी 9 से 10 मीटर के बीच की है।
सुरक्षा के लिहाज से भी सोचना होगा अहम कदम
अथॉरिटी सूत्रों की माने तो ऐसे में विस्फोटक से दोनों टावर तोड़े जाने का विकल्प सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं माना जा रहा है। आबादी के बीच विस्फोटक इस्तेमाल की एनओसी मिलना भी मुश्किल है। इस पर सीबीआरआई और अथॉरिटी अधिकारियों के बीच हुई बैठक में भी चर्चा हुई। अथॉरिटी अधिकारियों ने बैठक में सीबीआरआई डायरेक्टर से वह सुझाव देने के लिए कहा जो सबसे सुरक्षित हो।
टि्वन टावर की एसआईटी के लिए करवाई जा रही ड्रोन मैपिंग का काम भी सोमवार को पूरा हो गया। इसके बाद यह रिपोर्ट अथॉरिटी से एसआईटी को भेज दी गई। ड्रोन मैपिंग में दोनों टावर की ऊंचाई, अन्य टावर से दूरी व अन्य तथ्यों का आकलन फोटो व विडियो के जरिए किया गया है। अब आगे ड्रोन मैपिंग से अथॉरिटी कुछ तथ्य यह दोनों टावर तुड़वाए जाने के लिए और जुटाएगी। एसआईटी नोएडा अथॉरिटी से अपने सवालों के जवाब और जानकारियां खंगाल कर वापस हो चुकी है।
अभी एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। माना जा रहा है कि अभी फाइनल रिपोर्ट देने में दो दिन का और समय लग सकता है। एसआईटी रिपोर्ट में इस भ्रष्ट्राचार के जिम्मेदार तत्कालीन नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी व कर्मचारियों का नाम उजागर होगा। आगे शासन से ही कार्रवाई होगी।