गाजियाबाद नगर निगम ने फिर दिया महंगाई का झटका, बढ़ाए टैक्स


गाजियाबाद ब्यूरो। कोरोना काल में संकट से जूझ रहे गाजियाबाद शहर के लोगों को निगम ने महंगाई का एक और झटका दिया। इसके साथ ही निगम ने आउट सोर्सिंग पर नौकरी कर रहे कई वाहन चालकों को बेरोजगारी का करंट भी दे दिया। मंगलवार को हुई निगम कार्यकारिणी की बैठक में प्रॉपर्टी ट्रांसफर (नामांत्रण) को लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया। इसके हिसाब से अब जो भी प्रॉपर्टी खरीदार नामांत्रण कराएगा उसे पिछले समय में नामांत्रण नहीं कराए गए खरीदार का भी चार्ज अदा करना होगा।
साथ ही निगम डोर-टु-डोर कूड़ा कलेक्शन को पूरी तरह से निजीकरण करने जा रहा है। इससे निगम में आउट सोर्सिंग पर नौकरी करने वाले करीब 300 ड्राइवरों की नौकरी के लिए खतरा पैदा हो गया है। निगम कार्यकारिणी की बैठक मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई। बैठक में कुछ संशोधन के साथ सभी 10 प्रस्ताव पास हो गए। बैठक की अध्यक्षता मेयर आशा शर्मा ने की। इस दौरान नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि गाजियाबाद में हर वर्ष करीब 10 हजार के आसपास लोग प्रॉपर्टी खरीद करते हैं। उन सब पर ही इसका असर होगा। वैसे कार्यकारिणी में जब इस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी तो बीजेपी के किसी भी पार्षद ने विरोध नहीं किया। विरोध में कांग्रेस के पार्षद जाकिर अली सैफी बोले। मगर उनकी एक नहीं चली।
कोरोना के संकट काल में निगम ने हाल ही में हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत का इजाफा कर बड़ा झटका दिया था। अभी लोग उससे उबर नहीं पाए थे तब तक निगम कार्यकारिणी से शहर के लोगों को एक और झटका मिला। इस बार निगम ने यह झटका प्रॉपर्टी के नामांत्रण को महंगा कर दिया है। इसको ऐसे समझें, अगर किसी ने शहर में प्रॉपर्टी खरीदी है तो वह अपने नाम पर उसे दर्ज कराने के लिए स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत पैसा देता है।
कार्यकारिणी में पास हुए प्रस्ताव के मुताबिक पहले की तरह खरीदी गई प्रॉपर्टी में नगर निगम में अपना नाम दर्ज कराने के लिए स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत ही चार्ज पहले की तरह देना होगा। मगर इस बार निगम ने नया नियम बनाया कि अगर प्रॉपर्टी खरीद के 90 दिनों तक निगम में प्रॉपर्टी अपने नाम दर्ज नहीं कराई जो एक हजार रुपये चार्ज लगेगा।
एक नई और व्यवस्था यह की गई कि अगर कोई प्रॉपर्टी चार बार बिकी है तो अंतिम बार उसे जिसने खरीदा है। इससे पहले किसी ने नगर निगम में प्रॉपर्टी नाम दर्ज नहीं कराई थी तो उसे पहले तीन और एक अपना नाम दर्ज कराने के लिए चार बार खरीद में लगे स्टांप शुल्क का एक-एक प्रतिशत अदा करना होगा।
2. 300 वाहन चालकों की नौकरी खतरे में
नगर निगम कार्यकारिणी में एक ऐसा प्रस्ताव पास किया गया कि अगर उस पर अमल हुआ तो आउटसोर्सिंग पर नौकरी करने वाले बेरोजगार हो जाएंगे। दरअसल कार्यकारिणी में प्रस्ताव पास हुआ कि नगर निगम शहर के वार्डों से डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन, डलावघर से कूड़ा उठाकर उसे डंपिंग ग्राउंड तक भेजने और रोड स्वीपिंग मशीन को चलाने आदि का कार्य प्राइवेट एजेंसी के जरिए कराया जाएगा।
कार्यकारिणी को नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर जो ड्राइवर सीएलसी (सरकारी संस्था) के जरिए लिए गए हैं उन्हें वापस किया जाएगा। कुछ सफाई कर्मचारी आदि ड्राइवर पद पर नौकरी करते हैं उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा। जो निगम के ड्राइवर हैं उनसे ही केवल गाड़ी चलवाने का कार्य किया जाएगा। वाहन चालक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि सीएलसी से निगम ने करीब 250 ड्राइवर लिए हुए हैं। बोर्ड फंड से 50 ड्राइवर हैं, बाकि करीब 50 ड्राइवर निगम के कर्मचारी हैं जिनका मूल पद ड्राइवर नहीं है। अगर कार्य आउट सोर्सिंग पर जाता है तो करीब 300 वाहन चालकों की निगम में नौकरी जा सकती है।
3. पान, बीड़ी-सिगरेट बेचने के लिए लाइसेंस अनिवार्य
कार्यकारिणी में पास एक प्रस्ताव के अनुसार शहर में अब तंबाकू प्रोडक्ट बेचने वालों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए अस्थाई दुकानदारों को 200, स्थाई दुकानदारों को 1000, थोक स्थाई दुकानदारों को पांच हजार रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा। यह एक वर्ष तक के लिए मान्य होगा। लाइसेंस नवीनीकरण के लिए स्थाई थोक विक्रेता को पांच हजार, फुटकर विक्रेता को 200 और अस्थाई दुकानदार को 100 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
4. कारोबारियों की बढ़ी टेंशन
कई कारोबारियों को अब बढ़ा हुआ लाइसेंस शुल्क देना होगा। बारातघर, गेस्ट हाउस, होटल पर अभी तक 1000 रुपये शुल्क तय था। अब 3000 रुपये देना होगा। 20 बेड तक के नर्सिंग होम पर 2 हजार के स्थान पर अब 5 हजार, 20 बेड से बड़े नर्सिंग होम संचालकों के लिए 5 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये वार्षिक चार्ज देना होगा।