गाजियाबाद और नोएडा में बिना रजिस्ट्री फ्लैट बेचने वाले बिल्डरों पर दर्ज होगा मुकदमा


गाजियाबाद ब्यूरो। यूपी के गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में बिल्डरों ने नियमों की अनदेखी कर फ्लैटों को बेचा है। गाजियाबाद की बात की जाए तो यहां पर 12 हजार फ्लैटों को बिना रजिस्ट्री कराए बेच दिया गया है। जिसकी वजह से शासन का करीब 600 करोड़ रुपये का राजस्व फंसा हुआ है। स्टांप विभाग ऐसे बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। विभाग का कहना है कि कई बार ऐसे बिल्डरों को नोटिस दिया गया लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। अब इन पर कार्रवाई के लिए जीडीए के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
अधिकारी बताते हैं कि ऐसे सभी बिल्डर की सूची जीडीए को भेजी जा रही है। फिर इन बिल्डरों के चल रहे अन्य निर्माण और पुराने निर्माण में खाली फ्लैट सील किए जाएंगे। जिससे बिल्डर बिना रजिस्ट्री के बेचे हुए फ्लैट की रजिस्ट्री करवाने के लिए बाध्य हो सकें।
एआईजी स्टांप के.के. मिश्रा का कहना है कि 12 हजार फ्लैट बिना रजिस्ट्री करवाए ही बेचा जा चुका है। जिसकी वजह से हर फ्लैट पर औसतन पांच लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। कई बार नोटिस दिया गया है। अब जीडीए के साथ मिलकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। मालूम हो कि अभी कुछ दिन पहले ही स्टांप विभाग की तरफ से 25 बिल्डरों को नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन एक भी बिल्डर रजिस्ट्री करवाने के लिए नहीं आया।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के एआईजी केके मिश्रा बताते है कि 2 फायदे की वजह से बिल्डर फ्लैट की रजिस्ट्री करने से बचता है। पहला वह पूरे सोसायटी का अपने नाम ही बिजली का कनेक्शन लेता है। फ्लैट के निवासियों को बढ़े हुए रेट से बिजली की सप्लाई करता है। जिससे उसका हर महीने लाखों रुपये का फायदा होता है। दूसरा फ्लैट की रजिस्ट्री होते ही आवंटी फ्लैट का मालिक बन जाएगा। फिर वह वहां पर एओए के गठन से मेनटेनेंस की व्यवस्था खुद के कब्जे में लेने की कोशिश करेगा।
अधिकारी बताते हैं कि जिले में बड़ी संख्या में बायर्स बिना रजिस्ट्री के पजेशन ले चुके हैं। अब वह रजिस्ट्री के लिए जब बिल्डर्स से कहते हैं तो वह जीडीए से सीसी नहीं मिलने का बहाना बना देता है। जबकि नियम है कि बिना कम्पलीशन सार्टिफिकेट (सीसी) के किसी भी आवंटी को पजेशन नहीं दिया जाएगा।
बिल्डर बायर्स के साथ एग्रीमेंट करके फ्लैट को बेच देता है। इस तरह के राजनगर एक्सटेंशन में कई मामले जांच के बाद सामने आ चुके हैं। अधिकारी कहते हैं कि इस तरह के मामले स्टांप चोरी की श्रेणी में आते हैं। जीडीए के साथ मिलकर चलाए गए अभियान के बाद भी अगर बिल्डर फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। जीडीए से नक्शा पास करवाने के बाद बड़ी संख्या में बिल्डर ने बिना सीसी लिए हुए ही पजेशन दे दिया है। अब रेजिडेंट्स सुविधाएं नहीं मिलने से परेशान रहते हैं। बार-बार जीडीए में शिकायत करते हैं। जीडीए सीसी लेने के लिए दबाव बनाता है। लेकिन बिल्डर इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं करता है।