पुलिस कमिश्‍नर ने दी थी साइबर क्राइम पर क्‍लास, हफ्ते भर बाद ही प्रफेसर संग हो गई ठगी


वाराणसी। साइबर ठगी के शिकार तकनीकी के कम जानकार या ग्रामीण समुदाय के लोग ही नहीं होते हैं। इसके शिकार पढ़े-लिखे तबके के लोग भी बड़े पैमाने पर होते रहे हैं। इसे देखते हुए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ने बीते 7 सितंबर को बीएचयू के प्रफेसरों और कर्मचारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग भी की थी। बावजूद इसके बीएचयू आईआईटी के एक प्रफेसर को साइबर ठगों ने छह लाख का चूना लगा दिया।
बीएचयू आईआईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में प्रफेसर सत्यव्रत ने बताया कि 15 सितंबर को उनके पास एक मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि आपके बैंक खाते का केवाईसी करना है। प्रफेसर सत्‍यव्रत बोले, 'खुद को उसने एसबीआई बीएचयू का कर्मचारी बताया मैंने उस पर विश्वास किया और उसने मुझे एक ऐप डाउनलोड करने को बोला जैसे ही मैंने इस ऐप को डाउनलोड किया मेरे खाते से तुरंत ही पहले 500000 फिर 99000 कट गए। इसी बीच मेरे बेटे ने तुरंत ही ऐप को अनइंस्टाल कर दिया।
इस बात की जानकारी उन्होंने तत्काल लंका थाने को दी 16 तारीख को इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। लेकिन अभी तक पुलिस की ओर से मामले में प्रोफेसर से जांच टीम ने संपर्क नही किया है।
वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ऐ सतीश गणेश ने इस मामले में बताया कि मामला संज्ञान में आते ही नम्बर को ट्रेस किया जा रहा है। जल्द ही सफलता मिलेगी। साथ ही उन्होंने एक बार फिर अपील की कि अपने बैंक से जुड़ी गोपनीय डिटेल कभी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।