कृष्ण वेश में आए विजिटर को ताजमहल में एंट्री ना मिलने पर विवाद


आगरा। राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत) नाम के एक संगठन ने ताजमहल को बंद करने की धमकी दी है। संगठन के सदस्यों ने ताजमहल के पश्चिमी द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का कहना है कि अगर एएसआई स्टाफ सदस्य के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो ताजमहल को बंद कर दिया जाएगा। दरअसल एएसआई कर्मी ने भगवान कृष्ण की वेशभूषा में आए विजिटर को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था।
संगठन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को उसके स्टाफ सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का आरोप है कि इससे उस शख्स का अपमान हुआ है। अधीक्षण पुरातत्वविद् (आगरा सर्कल) वसंत के स्वर्णकार ने कहा कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी संरक्षित स्मारक पर प्रचार गतिविधियों की अनुमति नहीं है। नियमों के आधार पर ही एंट्री रोकी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, अतीत में कई बार ऐसा हुआ है जब राम दुपट्टा पहने लोगों के समूह को ऐतिहासिक स्मारक में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना शनिवार को हुई और संगठन ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। बताते चलें कि कोरोना काल में 61 दिनों के बाद 16 जून 2021 को पर्यटकों के लिए ताजमहल को दोबारा कोरोना प्रोटोकॉल के साथ खोला गया था।
ताजमहल को मोहब्बत की इमारत कहा जाता है। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था। मुमताज की मौत 14वें बच्चे को जन्म देते वक्त हुई थी। ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ और 1653 में पूर्ण हुआ था। इस इमारत को बनाने में 22 साल का समय लगा था। ताजमहल के निर्माण में उस वक्त 3.2 करोड़ रुपये का खर्च आया था। ताजमहल का वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी को कहा जाता है। 1983 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया था।