काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिन्दू पक्ष को झटका, हाई कोर्ट ने सर्वे कराने के आदेश पर रोक लगाई


वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मामले में गुरुवार को हिंदू पक्ष को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के लोवर कोर्ट के आदेश के फैसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने रोक लगाते हुए यह कहा है कि जब मामला पहले से अदालत में है तो ऐसे में सर्वेक्षण की क्या आवश्यकता है?
दरअसल, काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी केस में वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट ) आशुतोष तिवारी की अदालत ने 8 अप्रैल 2021 को ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। कोर्ट ने सर्वेक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश देते हुए 5 सदस्य कमेटी गठित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही उसमें यह कहा था कि 5 सदस्यीय कमेटी में 2 अल्पसंख्यक जरूर हों, सर्वेक्षण संबंधित यह कार्य एएसआई की ओर से नियुक्त ऑब्जर्वर की निगरानी में होना था।
फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष गया था हाई कोर्ट
सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद की ओर से अंजुमन इंतेजामिया मसाज़िद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। इसी मामले में बहस पूरी होने के बाद गुरुवार को हाई कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी के सर्वेक्षण वाले आदेश पर स्टे दे दिया है। अंजुमन इंतेजामिया मसाज़िद के महासवचिव यासीन ने बताया कि 1991 के पूजा स्थल कानून के अनुसार किसी कोर्ट में लंबित मामले में इस प्रकार का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता था। इसलिए हम इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट गए थे। आज इसी मामले में फैसला आया है और अब ज्ञानवापी परिसर की खुदाई करा कर सर्वेक्षण नहीं कराया जा सकेगा ।
हिन्दू पक्ष की दलील
हाईकोर्ट के फैसले को हिन्दू पक्ष के लिए एक झटका माना जा रहा है । लॉर्ड विश्वेशर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के मुताबिक, सर्वेक्षण पर रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि हाई कोर्ट के फैसले में ये कहा गया है कि ज्ञानवापी का मामला जब एक कोर्ट में चल रहा है तो किसी अन्य कोर्ट में ज्ञानवापी के मामले नहीं चल सकते। पूर्व में आए फैसले पर किसी प्रकार के रोक नहीं लगाई गई है।