कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की कथित तौर पर हत्या, पत्नी मीनाक्षी ने कहा, नहीं चाहती हैं सीबीआई जांच


  • कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की कथित तौर पर हत्या
  • गोरखपुर के एक होटल में पुलिसवालों की पिटाई से मौत का आरोप
  • पत्नी मीनाक्षी ने पति की हत्या मामले में की थी सीबीआई जांच की मांग
  • अब मीनाक्षी ने कहा, नहीं चाहती हैं सीबीआई जांच
कानपुर ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के कानपुर में प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की कथित रूप से गोरखपुर के एक होटल में पीटकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप छह पुलिसवालों पर लगा है। इस मामले ने पूरी प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले हुई इतनी बड़ी घटना से विपक्ष को चुनावी मुद्दा मिल गया और मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना की सूचना पर गोरखपुर पहुंची मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने न्याय मांगा। शुरू में उन्होंने कहा कि उन्हें गोरखपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है। मामले की सीबीआई जांच कराई जाए। उसके बाद उन्होंने सीबीआई जांच न कराने की मांग रखी।
मीनाक्षी ने गुरुवार तड़के पति कि अंत्येष्टि के बाद पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि वह सीबीआई जांच नहीं चाहती हैं। उन्हों ने कहा, 'मैं सीबीआई जांच नहीं चाहती हूं, मैं वह दूसरी वाली जांच चाहती हूं।' कोई कहता है एसआईटी वाली जांच तो वह कहती हैं हां एसआईटी वाली जांच हो। उन्होंने कहा कि 'मैंने आप लोगों को वॉट्सऐप किया था कि सीबीआई जांच पर वो नहीं चाहिए, मैं फिर से वॉट्सऐप कर दूंगी।'
सीबीआई पर उठने लगे हैं सवाल
अधिकांश बड़े अपराधों में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग होती थी लेकिन बीते समय से जांच एंजेसी की शाख गिरती जा रही है। लंबित मामलों, धीमी जांच और कंविक्शन रेट कम होने के कारण अब लोग सीबीआई जांच नहीं चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई पर सख्त टिप्पणी की थी। एक मामले में देरी के चलते दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'कहा कि किसी भी मामले में सीबीआई का केस दर्ज करके जांच शुरू कर देना ही काफी नहीं होता। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि मामला अपनी तार्किक परिणति तक पहुंचे और दोषियों को वाजिब सजा मिले।'
2013 में ही सुप्रीम कोर्ट ने एक चर्चित मामले में सीबीआई को पिंजरे का तोता बता दिया था। आशय यह था कि जांच एजेंसी अपने मन से कुछ नहीं करती, अपने मालिक यानी सरकार की बात दोहराती रहती है। तब से सीबीआई को स्वायत्त बनाने की बातें तो बहुत हुईं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पिछले महीने भी सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की जांच में देरी के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर केस में दम है तो आपको चार्जशीट फाइल करनी चाहिए, लेकिन अगर आपको कुछ नहीं मिलता है तो मामला खत्म होना चाहिए। बेवजह तलवार न लटकाए रखें।