अतिक्रमण नहीं हटा, तो एमसीडी इंजीनियर और एसएचओ व्यक्तिगत रूप से होंगे जिम्मेदार : दिल्ली हाई कोर्ट


राजीव गौड़,(दिल्ली ब्यूरो)। हाई कोर्ट ने 'नो हॉकिंग और नो वेंडिंग जोन' घोषित इलाकों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश की यहां अनदेखी पर निराशा जताई है। अजमल खान मार्केट और करोल बाग मेट्रो स्टेशन के आसपास सार्वजनिक जगहों और रास्तों पर अतिक्रमण और अनिधकृत कब्जे से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अगर आदेश पर अब भी अमल नहीं हुआ तो इसके लिए नॉर्थ एमसीडी के संबंधित इग्जेक्युटिव इंजीनियर और इलाके के एसएचओ व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने यह आदेश पारित किया। उन्होंने निराशा जताते हुए अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी प्राधिकरणों ने सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश की अनदेखी कर दी। नॉर्थ एमसीडी को निर्देश दिया कि दो दिनों के भीतर उचित जगहों को 'नो हॉकिंग एरिया' घोषित करते हुए वहां परमानेंट डिसप्ले बोर्ड लगाए। संबंधित निगम के इग्जेक्युटिव इंजीनियर और करोल बाग थाने के एसएचओ को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि अजमल खान रोड और करोल बाग मेट्रो स्टेशन के आसपास सार्वजनिक स्थानों पर कहीं भी रेहड़ी-पटरी न लगने पाए और न ही वहां पर कोई अतिक्रमण हो।
आदेश के मुताबिक, अथॉरिटीज को ऐसे इलाकों पर कड़ी नजर बनाकर रखनी होगी और नियमित रूप से कार्रवाई करनी पड़ेगी। चेतावनी दी गई कि अगर अतिक्रमण नहीं हटा तो इलाके के इग्जेक्युटिव इंजीनियर और करोल बाग थाने के एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। मामले में 1 दिसंबर को अगली सुनवाई पर उन्हें कोर्ट में इसकी स्टेटस रिपोर्ट दायर करनी है।
हाई कोर्ट ने यह आदेश संजीव कपूर की याचिका पर सुनाया। एडवोकेट भावना पांडे और जिया कपूर के जरिए दायर याचिका पर उक्त प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किए गए। याचिकाकर्ता ने खासतौर पर अजमल खान मार्केट और करोल बाग मेट्रो स्टेशन के आसपास अवैध और अनधिकृत अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। याचिका के जवाब में संबंधित निगम ने स्टेटस रिपोर्ट दायर की। दावा किया कि उसने अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया है। हालांकि, हटाए जाने के बाद फिर से ऐसे लोग वहां जम जाते हैं। दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने के लिए अनुरोध करने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली।