यूपी में गंगा को न‍िर्मल करने का नया प्‍लान, 12 जिलों में नदी में छोड़ी जाएंगी 15 लाख मछलियां


वाराणसी। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। गंगा की सफाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूपी की योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं से रही है। अब यूपी सरकार के मत्स्य विभाग ने गंगा में प्राकृतिक तरीके से सफाई के लिए प्रदेश के 12 जिलों में कुल अलग-अलग प्रजातियों के 15 लाख मछलियों को छोड़ेगी। कहा जा रहा है क‍ि ये मछलियां गंगा में अपशिष्ट पदार्थों को खत्म कर के गंगा को प्रकृतिक तरीके से सफाई में मददगार साब‍ित होंगी। इसके साथ ही गंगा के जलीय इकोसिस्टम में भी सुधार होगा। यूपी सरकार की इस परियोजना को लेकर जीव विज्ञानी भी उत्साहित हैं और इसे एक बेहतर कदम बता रहे हैं।
नमामि गंगे के सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि गंगा को साफ रखने के लिए शहरों में लगातार कई एसटीपी प्लांट बनाए जा रहे हैं। गंगा टास्क फोर्स का गठन किया गया है। लगातार गंगा में किसी तरह की गंदगी न डाला जाए इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यूपी सरकार ने गंगा को निर्मल बनाने के लिए अब 12 जिलों में 15 लाख मछलियां छोड़ेगी। ये रिवर रिंचिंग गंगा के इकोसिस्टम को बरकरार रखेगी। गंगा के जलीय जीवन को संतुलित कर के प्राकृतिक तरीके से गंगा को साफ रखने में मददगार होगी ।
मत्स्य विभाग के उप निदेशक एएस रहमानी बताते हैं कि इस योजना के तहत सितंबर महीने में ही वाराणसी, गाज़ीपुर, प्रयागराज, बुलंदशहर, कानपुर , अमरोहा, बिजनोर समेत 12 जिलों को रिवर रिंचिंग तकनीकी के लिए चयनित किया गया है। इस तकनीक में रोहू, कतला,मृगला, नस्ल की मछलिया गंगा में छोड़ी जाएंगी। रहमानी के मुताबिक 4 हज़ार वर्गमीटर में मौजूद 15 सौ किलो मछलियां 1 मिलीग्राम नाइट्रोजन वेस्ट को नियंत्रित करती हैं। हर दिन गंगा में काफी संख्या में नाइट्रोजन का प्रवाह होता है। अगर नाइट्रोजन की मात्रा 100 मिलीग्राम प्रति लीटर या इस से अधिक हो जाता है तो यह जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचता है। ये मछलिया इस नाइट्रोजन अपशिष्ट को नियंत्रित करेंगी।
बीएचयू के जीव विज्ञानी प्रो कृपा शंकर ने यूपी सरकार के इस प्रयास को सराहनीय कदम बताया और कहा कि गंगा की सफाई के लिए उसके इकोसिस्टम को बनाए रखना जरूरी है। क्योंकि पर्यावरण के सिद्धांतों के लिहाज से जलीय इकोसिस्टम में मछलियां अगर प्राकृतिक माहौल में प्रजनन करती है और अगर उनकी संख्या बढ़ेगी तो प्राकृतिक प्रजनन से नदियों का प्रदूषण नियंत्रण करने में लाभकारी होगा।