शिक्षा निदेशालय के नियमों के चलते पुरानी दिल्ली के करीब 150 स्कूलों पर लटकेगा ताला!


दिल्‍ली ब्यूरो। पुरानी दिल्ली के स्पेशल एरिया में जितने भी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल हैं, वे बंद होने के कगार पर हैं। ऐसा इसलिए कि कई स्कूलों के पास फायर एनओसी नहीं हैं। फायर डिपार्टमेंट इन स्कूलों को एनओसी जारी नहीं कर रहा है, वजह है कि शिक्षा निदेशालय के नियमों के अनुसार स्कूलों के मुख्य गेट तक जाने वाली सड़क की चौड़ाई 6 मीटर नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐसे करीब 120-150 स्कूल इस एरिया में हैं।
सूत्रों के अनुसार पुरानी दिल्ली का पूरा एरिया, पहाड़गंज और शाहजहानाबाद ये सभी स्पेशल एरिया में आते हैं। ऐसे इलाके काफी पुराने और संकीर्ण हैं। इन इलाकों में बच्चों के एजुकेशन के लिए सैकड़ों सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल हैं। लेकिन, कम ही स्कूलों के पास फायर एनओसी है। शिक्षा निदेशालय ने राइट टु एजुकेशन एक्ट के तहत साल 2005 में जो नियम बनाए थे, उनमें स्कूल बनाने के लिए फायर एनओसी के प्रावधान नहीं थे। लेकिन मार्च-2011 में निदेशालय ने नियमों में संशोधन कर स्कूल बनाने के लिए मुख्य गेट तक जाने वाली सड़क की चौड़ाई कम से कम 6 मीटर रखने के प्रावधान को शामिल किया। यह नियम नए और पुराने सभी स्कूलों के लिए लागू है। इसके बाद से ही स्कूलों को समस्या होने लगी क्योंकि नए नियम लागू होने के बाद फायर डिपार्टमेंट ने ऐसे स्कूलों को फायर एनओसी जारी करने से मना कर दिया है। इस इलाके के 120-150 ऐसे स्कूल हैं, जिसके आगे की सड़कों की चौड़ाई बेहद कम है। ऐसे स्कूलों के बंद होने का खतरा बताया गया है।
स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें शिक्षा निदेशालय से मांग की गई है कि स्कूल को फायर एनओसी जारी करने के नियमों में बदलाव किया जाए। खासतौर पर जो स्कूल स्पेशल एरिया में स्थित हैं। अफसरों का कहना है कि स्पेशल एरिया में एमसीडी के ऐसे 12 से अधिक स्कूल हैं। इसके अलावा कुछ मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त स्कूल भी हैं।