लखीमपुर हिंसा: योगी के एक्शन से ठंडा पड़ा विपक्ष का दांव, 24 घंटे के भीतर निकला सुलह का रास्ता


लखनऊ। किसानों के प्रदर्शन के दौरान लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा को लेकर आज उत्तर प्रदेश में दिनभर सियासी बवाल रहा। विपक्षी दल लगातार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरते रहें। कई नेताओं ने घटना वाली जगह जाने की कोशिश की लेकिन उन्हें जाने से रोका गया। कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। लेकिन जिस तरीके से लखीमपुर मामले को लेकर सियासी शोर उठी, उससे कहीं ना कहीं योगी सरकार और प्रशासन के हाथ पांव जरूर फूल गए थे। लेकिन 24 घंटे के अंदर ही योगी सरकार ने पूरे घटनाक्रम को मैनेज कर लिया। लखीमपुर खीरी में सुलह का रास्ता निकाला गया जिसके बाद से विपक्ष का दांव अब ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। 
जैसे ही लखीमपुर में हिंसा के खबर आई, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन में आ गए। उन्होंने तुरंत एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार को मौके पर भेजा। प्रशांत के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी गए थे। योगी आदित्यनाथ ने खुद लोगों से इस मामले को लेकर शांति बनाए रखने की अपील की थी और कहा था कि दोषियों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। हालांकि जिस तरीके से लखीमपुर हिंसा मामले को राजनीति शुरू हुई उससे कहीं ना कहीं प्रशासन अलर्ट पर आ गया था। कई विपक्ष और किसान नेताओं का आज लखीमपुर दौरे का पूरा प्लान था लेकिन सब धरा का धरा रह गया क्योंकि किसी को जाने की इजाजत नहीं दी गई और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। 
उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच करेंगे और घटना में मारे गए चार किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये के मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी। लखीमपुर खीरी में हिंसा में किसानों की मौत के बाद उप्र शासन के अधिकारियों और किसानों के बीच समझौता हो गया है और उनकी सभी मांगे मान ली गयी हैं। घायलों को बेहतर इलाज के लिये 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। किसानों की मांग पर पूरे मामले की प्रभावी जांच जल्द से जल्द करायी जायेंगी। लखीमपुर में भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी में अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने घायलों को मुआवजा, नौकरी और आर्थिक मदद देने के सरकार के फैसले की घोषणा की। लखीमपुर में संवाददाता सम्मेलन में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि इस मामले में दोषी कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि किसान नेताओं से समझौते के बाद अब मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार करवाया जाएगा।
लखीमपुर खीरी कांड को लेकर सियासी घमासान 
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत के मामले को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। सोमवार को मौके पर जाने की कोशिश करने वाले सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं को रोक दिया गया था या हिरासत में लिया गया था। हालांकि शाम होते-होते तक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव आदि नेताओं को पुलिस ने हिरासत से छोड़ दिया। वहीं, सोमवार तड़के लखीमपुर खीरी जाते वक्त सीतापुर में हिरासत में ली गई कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने पीड़ित किसान परिवारों से मुलाकात के बगैर वापस नहीं जाने का ऐलान किया है। कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने दावा किया, अभी तक प्रियंका गांधी वाद्रा हिरासत में हैं और इससे देश भर में भारी रोष है। सीतापुर में कार्यकर्ताओं का बड़ा जमावड़ा हो रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीतापुर में पीएसी छावनी के सामने कैंडल मार्च भी निकाला। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ से लखीमपुर जाने से रोक दिया गया, जिसके बाद अखिलेश सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। बाद में उन्हें तथा पार्टी के मुख्य महासचिव रामगोपाल यादव को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें पुलिस बल इको गार्डन (धरना स्थल) लेकर गई।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के मुखिया शिवपाल सिंह यादव को हिरासत में ले लिया गया जबकि राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह को रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर रोक दिया गया। बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को भी लखीमपुर जाने से रोका गया। मिश्र को पुलिस ने उनके घर में ही रोक दिया था। सपा अध्यक्ष यादव ने सड़क पर धरना प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया, किसानों पर इतना अन्याय इतना जुल्म अंग्रेजों ने भी नहीं किया था जितना भाजपा नीत सरकार कर रही है। सरकार विपक्ष के किसी भी नेता को लखीमपुर खीरी क्यों नहीं जाने देना चाहती? सरकार आखिर क्या छुपाना चाहती है? यह सरकार इस बात से घबराती है कि जनता कहीं सच्चाई न जान जाए। अखिलेश ने आरोप लगाया, भाजपा नीत सरकार पूरी तरह असफल हुई है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने लगाए साजिश के आरोप
लखीमपुर खीरी मामले को लेकर निशाने पर आए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने इस घटना में अपने खिलाफ साजिश रचे जाने का आरोप लगाया है। मिश्रा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें लगता है कि इस मामले में उनके खिलाफ साजिश की गई है। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच छुपे कुछ अराजक तत्वों ने वारदात के दौरान घायल हुए लोगों को पीट-पीटकर उनसे कहा कि तुम मंत्री का नाम लो।” मिश्रा ने यह भी कहा, “मेरे बेटे पर भी आरोप लगाने का प्रयास किया गया है। जिस तरह गाड़ी से खींच-खींच कर हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या की गई, यह हो सकता है कि मेरे बेटे की हत्या की योजना रही हो।” उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ में बहराइच, पीलीभीत तथा कुछ अन्य जिलों के लोगों के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। ऐसा लगता है कि पहले से ही कोई साजिश रची गई थी। मिश्रा ने कहा, “मेरी प्रशासन और मुख्यमंत्री जी से मांग है कि हमारे जो कार्यकर्ता मारे गए हैं, उनके परिजन को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और घटना की चाहे न्यायिक जांच, सीबीआई जांच या किसी भी तरह की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।”