चंद्रा बंधुओं की मदद करने के मामले में तिहाड़ जेल के 32 अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज


दिल्‍ली ब्यूरो। रियल एस्टेट की नामी कंपनी यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों को तिहाड़ जेल में तिहाड़ के 32 अधिकारियों ने गलत तरीके से सहायता पहुंचाई थी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की जांच में ये बात सामने आई है। इस बाबत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गलत तरीके से मदद पहुंचाने और सुविधाएं मुहैया कराने के आरोपी जेल अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार को मामला दर्ज कर लिया। दिल्ली पुलिस ने इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए गृहमंत्रालय व तिहाड़ को पत्र लिख दिया है। 
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि शुरूआती जांच में तिहाड़ जेल नंबर सात के 32 अधिकारियों की आरोपी अजय चंद्रा व संजय चंद्रा से मिलीभगत सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल के उन अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और आपराधिक जांच का निर्देश दिया था, जिन्होंने यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को जेल में रहने के दौरान अनुचित सहायता प्रदान की थी। 
न्यायालय ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को भी मामले में तत्काल जांच करने का निर्देश दिया था। जांच के बाद, 28 सितंबर को इस संबंध में दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने न्यायालय में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। छह अक्तूबर को जांच रिपोर्ट को देखने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में एक पूर्ण आपराधिक जांच करने की अनुमति दी। इसी के तहत 12 अक्तूबर को अपराध शाखा ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून और धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। 
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने यूनिटेक कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद चंद्रा बंधुओं को तिहाड़ से मुंबई की आर्थर रोड जेल और तलोजा जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। बाद में इन्हें मुंबई जेल में शिफ्ट कर दियागया था। प्रवर्तन निदेशालय की अदालत को सौंपे रिपोर्ट में कुछ जेल अधिकारियों की मिलीभगत से चंद्रा बंधुओं के जेल से कई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही थी। गत 26 अगस्त को पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को को ईडी की रिपोर्ट के आधार पर तिहाड़ जेल स्टाफ के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया था।