40 किलो सोना, 6.5 करोड़ कैश किसका था? 4 महीने बाद भी नोएडा पुलिस की जांच अधूरी


  • नोएडा में 40 किलो सोना और साढ़े 6 करोड़ की हुई थी चोरी
  • किसलय पांडेय का बताया गया था सोना और कैश
  • किसलय पांडेय के परिवार ने किया था इनकार
  • आधी-अधूरी जांच के बाद नोएडा पुलिस की जांच हुई बंद
नोएडा ब्यूरो। नोएडा की सबसे बड़ी चोरी का खुलासा कर वाहवाही बटोरने वाली नोएडा पुलिस उसी चोरी की जांच में बैकफुट पर है। पुलिस जांच को आगे बढ़ा नहीं पा रही या बढ़ाना नहीं चाहती, वजह स्पष्ट नहीं है। लेकिन पिछले दो महीने से ज्यादा समय से इस केस की फाइल बीच जांच में बंद पड़ी है। केस में फरार दो आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। वहीं पुलिस ने सोना और कैश जिस राममणि पांडेय और किसलय पांडेय का बताया गया, उनका नाम भी केस में दर्ज नहीं किया गया। यहीं नहीं कार्रवाई के दावे जो पुलिस अधिकारियों की तरफ से किए गए वह भी जमीन पर नहीं उतर पाए। मौजूदा समय में जांच में क्या हो रहा है, जांच किस स्तर पर है। अब तो यह कोई पुलिस अधिकारी भी बताने के लिए तैयार नहीं है।
11 जून को इस चोरी का खुलासा डीसीपी नोएडा ने किया था
आरोपियों के पास 13 किलो सोना, 57 लाख रुपये कैश, 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी दस्तावेज और एक स्कॉर्पियो बरामद हुई थी। पुलिस ने बताया कि 40 किलो सोना और 6.5 करोड़ रुपये कैश की यह चोरी 10 चोरों ने की थी। लेकिन इस चोरी का कोई केस नहीं दर्ज हुआ था। इसके बाद सवाल यह उठने लगा था कि आखिर प्रॉपर्टी थी किसकी। पुलिस ने यह खुलासा भी आगे अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर किया कि यह संपत्ति राममणि पांडेय और उसके बेटे किसलय पांडेय की थी। इसे राममणि की पत्नी संजू पांडेय ने सिल्वर सिटी के फ्लैट नंबर-301 को किराए पर लेकर रखवाया था। पुलिस अधिकारियों के इस खुलासे के विपरीत किसलय पांडेय अपना या अपने परिवार का कोई भी कनेक्शन इस संपत्ति से होने की बात से इंकार करता रहा है। पुलिस ने चोरी के आरोपियों के कब्जे से मिले राममणि और उसके बेटे किसलय और घरवालों के दस्तावेजों को आधार बनाकर कार्रवाई की बात कही थी। कार्रवाई यह होनी थी कि केस में राममणि पांडेय और किसलय पांडेय को इस संपत्ति का वारिस दिखाया जाता। संपत्ति कैसे हासिल की इसकी जांच होनी थी। पुलिस अधिकारियों ने लगातार इस पड़ताल के दावे भी किए, लेकिन फिर धीरे-धीरे यह जांच ठंढे बस्ते में पहुंचा दी गई।
केस की जांच में थाना भी बदल चुकी है नोएडा पुलिस
चोरी का खुलासा गिरफ्तारी कर सेक्टर-39 थाना पुलिस ने किया था। उस समय थाना प्रभारी आजाद तोमर थे। जांच के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि पुलिस अधिकारियों ने थाना-39 से यह जांच अचानक हटाकर सेक्टर-20 थाने में ट्रांसफर की। केस का खुलासा करने वाले इंस्पेक्टर आजाद तोमर को थाने से सम्मानजनक ट्रांसफर भी हासिल नहीं हुआ। कुछ दिन बाद ही हुई एक लूट केस में लापरवाही के नाम पर उनको सस्पेंड कर लाइन में भेज दिया गया। कार्रवाई और जांच दूसरे थाने में ट्रांसफर होने के पीछे कारण को लेकर भी कई चर्चाएं हैं।
मास्टरमाइंड को नहीं गिरफ्तार कर पाई थी पुलिस
इस केस में चोरी का मास्टरमाइंड गाजियाबाद के कोतवालपुर का निवासी गोपाल था। नोएडा पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद इस केस में रिमांड पर लाकर पूछताछ और कार्रवाई हुई। अब तक इस चोरी के केस में गिरफ्तार हो चुके आरोपियों में राजन भाटी, अनिल, बिट्टू शर्मा निवासी सलारपुर, नीरज और जय सिंह निवासी भूड़ा, अरुण निवासी मुरादाबाद, प्रदीप निवासी लखावटी मढैया बुलंदशहर, सन्नी निवासी कोतवालपुर और मास्टरमाइंड का नाम शामिल हैं। सिमतल और पंकज नाम के दो आरोपी अभी गिरफ्तार होना बाकी हैं।