दिल्ली पुलिस के ऑपरेशन 'तेजस्विनी-46' की धाकड़ लेडी बनी जिले में ‘आशा की किरण’


  • ऑपरेशन 'तेजस्विनी-46' की धाकड़ लेडी बनी जिले में 'आशा की किरण'
  • 46 महिला कॉन्स्टेबल ने इन तीन महीनों में साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं
  • बुजुर्गों के लिए उनकी बेटी व बच्चों के लिए उनकी दीदी का फर्ज निस्वार्थ से पूरा करती है
नई दिल्ली। वुमन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी के लिए तीन महीने पहले शुरू किए गए 'तेजस्विनी' के अभूतपूर्व रिजल्ट से दिल्ली पुलिस अफसर गदगद हैं। संवेदनशील इलाकों को चिन्हित करके बीट्स में तैनात 46 महिला कॉन्स्टेबल ने इन तीन महीनों में साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं। जरूरत पड़ने पर हर मोर्चे पर मुस्तैदी से वर्दी के फर्ज को निभा सकती हैं।
डीसीपी उषा रंगनानी ने बताया, हमने इस टीम का नाम तेजस्विनी रखा था। टीम ने पब्लिक प्लेस में दिन रात घूम-घूमकर महिलाओं, लड़कियों और बुजुर्गों के मन सुरक्षा की भावना पैदा की। चाहे वो क्यूआरटी, बाइक पट्रोलिंग, ईआरवी या स्कूटी पर राउंड लगाना ही क्यों न हो। पब्लिक के भरोसे का ही नतीजा है कि लोगों ने एक वुमन कॉन्स्टेबल का नाम 'आशा की किरण' रख दिया। भारत नगर की किरण अकेले ही स्नैचर का पीछा करती थीं। इलाके में बहादुरी और साहस का चेहरा बन गईं। डीसीपी के मुताबिक, तीन महीने पहले 10 जुलाई को इस ऑपरेशन की शुरुआत की गई थी। जिसमें जहांगीरपुरी, शकूरपुर और पीतमपुरा के रेजिडेंशल इलाकों, जेजे क्लस्टर, भलस्वा गांव, मार्केट, मॉल कॉम्प्लेक्स, मेट्रो स्टेशन, स्कूल और कॉलेज जैसी जगहों पर 46 महिला बीट कॉन्स्टेबलों को तैनात किया गया था।
उन्होंने खुद ऑपरेशन को लेकर कई बैठकें और ओपन हाउस आयोजित किए। जिसमें जमीनी हकीकत को जानने की कोशिश की गई। पहले क्या थी और अब क्या है और उसको किस तरह से ओर बेहतर किया जा सकता है। महिलाओं के साथ छेड़छाड़, रेप, अन्य तरह के टॉर्चर से निपटने के लिए उन्हें सशक्त बनाया गया। ये कॉन्स्टेबल 'डोरस्टेप पुलिसिंग' करती हैं। लोगों के चेहरों पर मुस्कान आती है। बुजुर्गों की नम आंखें और कांपते हाथों से इन्हें मिलने वाले आशीर्वाद इरादों को मजबूत बनाते है। बुजुर्गों के लिए उनकी बेटी व बच्चों के लिए उनकी दीदी का फर्ज निस्वार्थ से पूरा करती है। ऑपरेशन तेजस्विनी का दायरा बढ़ाया जा रहा है।