गाजियाबाद में बीमा के नाम पर 550 लोगों से ठगे 50 करोड़, बंटी-बबली समेत 3 गिरफ्तार


गाजियाबाद ब्यूरो। गाजियाबाद की थाना इंदिरापुरम पुलिस और साइबर सेल टीम को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने पॉलिसी मैच्योरिटी करने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक गैंग का पर्दाफाश करते हुए गैंग में शामिल बंटी-बबली समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनके कब्जे से ठगी के पैसों से खरीदी गई एक लग्जरी कार, 4 मोबाइल फोन, एक पासबुक और 97000 रुपये के अलावा तमाम दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इस गैंग का एक और साथी अभी फरार है। जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
साइबर सेल प्रभारी अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि इंदिरापुरम इलाके में ही रहने वाले एक रिटायर्ड शख्स ने तहरीर दी थी। उसने बताया था कि पॉलिसी की मैच्योरिटी के नाम पर एक गैंग ने 87 लाखों रुपये ठग लिए हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज करते हुए इस पूरे मामले को साइबर सेल टीम को सौंपा गया। जिसके बाद गहन जांच की गई और जाल बिछाया तो पुलिस इस गैंग तक जा पहुंची। इस गैंग के सदस्यों ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक कार्यालय बनाया हुआ था। जहां से कॉल सेंटर संचालित होता था और वही से पॉलिसी मैच्योरिटी के नाम पर लोगों के साथ ठगी की जाती थी। पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके पर इस गैंग में शामिल पति-पत्नी समेत कुल 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार किए गए धीरज कुमार, हुमा खान पत्नी धीरज और अक्षय ने गहन बताया कि धीरज और हुमा खान ने प्रेम विवाह किया था। जिसके बाद उन्हें ऐशोआराम की जिंदगी जीने के लिए अधिक पैसे की आवश्यकता थी। इसलिए उन्होंने एक गैंग तैयार किया और बाकायदा इसके लिए लक्ष्मी नगर में एक कार्यालय बनाया गया। जहां से कॉल सेंटर संचालित किया गया। वहीं से फर्जी आईडी पर सिम और फर्जी पते पर बैंक खाता खुलवा कर फर्जी नंबरों से कॉल कर पॉलिसी मैच्योर कराने के नाम पर अपने आपको एचडीएफसी और आईआरडीए वित्त मंत्रालय का अधिकारी या कर्मचारी बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर अपने फर्जी बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करा लेते थे और ठगी किए गए पैसे को वह चार हिस्सों में बराबर बांटते थे।
क्षेत्राधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि पकड़े गए दोनों पति-पत्नी और उनका एक साथी के अलावा फरार साथी समेत यह चारों लोग पहले नोएडा स्थित एक कंपनी में नौकरी करते थे। वहीं से इन चारों ने लोगों को ठगे जाने की योजना तैयार की थी। उसके बाद इन्होंने आपस में मिलकर लक्ष्मी नगर में एक कार्यालय खोला था और वहीं से यह लोगों के साथ ठगी किया करते थे। इनका यह गैंग पिछले 4 साल से लगातार सक्रिय था।