गर्भवती को लकड़ी में कपड़ा बांधकर 5 किमी तक लादकर ले गए ग्रामीण, गांव तक नहीं पहुंचती एंबुलेंस


बड़वानी। मध्य प्रदेश में जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जमीन का खसरा जैसी कई सरकारी सुविधाएं अब घर बैठे ही मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को यह ऐलान किया और कई विभागों के पोर्टल लॉन्च कर इसकी औपचारिक शुरुआत भी कर दी, लेकिन प्रदेश के कई हिस्से अब भी सड़क और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। विकास की रोशनी से कोसों दूर कई इलाकों की हालत यह है कि मरीज को लकड़ी में कपड़ा बांधकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। सुशासन का दावा करने वाली सरकार के मुखिया कैश बेनिफिट को हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर कर अपनी पीठ ठोंक लेते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को होने वाली इस तरह की परेशानियो से आंखें मूंद लेते हैं।
ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र की सीमा से लगे एमपी के बड़वानी जिले से सामने आया है जहां गर्भवती महिला को लकड़ी में कपड़ा बांधकर पांच किलोमीटर तक अस्पताल ले जाना पड़ा। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर कंजापानी गांव में रहने वाली 20 साल की चैना बाई मजदूरी करती है। गुरुवार को उसे डिलीवरी पेन हुआ तो स्थानीय आशा कार्यकर्ता ने तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह दी। उसने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन गांव में सड़क ही नहीं है कि एंबुलेंस वहां तक पहुंच सकती। ग्रामीणों ने लकड़ी में कपड़ा बांधकर चैना बाई को उसमें लादा और पांच किलोमीटर दूर ललवनिया लेकर गए, जहां एंबुलेंस खड़ी थी। एंबुलेंस से उसे पनसेमल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उसने बच्चे को जन्म दिया।
जिले के शिओनी पंचायत के कई गांवों में आज तक सड़क नहीं बनी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिला या अन्य मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए उन्हें यही तरीका अपनाना पड़ता है। ग्रामीण अपनी फसल को बाजार ले जाने के लिए खच्चर की मदद लेते हैं। वे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क के लिए वर्षों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
बड़वानी के कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने बताया कि जिले के करीब 375 इलाकों में सड़क नहीं है। ये सभी इलाके वन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने भरोसा दिया कि एनओसी मिलते ही मनरेगा के तहत इन इलाकों में सड़कों का निर्माण किया जाएगा, लेकिन एनओसी कब मिलेगी, इसकी कोई समयसीमा उन्होंने नहीं बताई।
सड़क की समस्या केवल बड़वानी जिले तक ही सीमित नहीं है। सितंबर महीने में छतरपुर जिले में एक गर्भवती महिला की अस्पताल के रास्ते में ही मृत्यु हो गई क्योंकि सड़क नहीं होने के चलते एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीण उसे ट्रैक्टर से लेकर चले, लेकिन वह कीचड़ में फंस गई और बेबस ग्रामीण महिला की जान जाते हुए देखते रहे।