एनसीबी गवाह प्रभकार सैल की मांग पूरी, मुंबई पुलिस मुहैया करवाई सुरक्षा


मुंबई ब्यूरो। एनसीबी के गवाह प्रभाकर सैल ने समीर वानखेड़े से अपनी जान को खतरा बताते हुए मुंबई पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। मुंबई पुलिस ने सैल की मांग को स्वीकारते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि सहार पुलिस स्टेशन में उनका बयान दर्ज किया गया है। इसके अलावा उन्होंने हलफनामा और अन्य सबूत मुंबई पुलिस के सुपुर्द किए हैं। सैल ने बताया कि पुलिस ने उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं प्रभाकर के इस खुलासे के बाद उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। मीडिया से बात करते हुए प्रभाकर की मां हीरावती ने बताया कि जब से उन्होंने यह सुना है कि उनके बेटे ने ड्रग्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। तब से उनकी चिंता बढ़ गई है और तबीयत भी खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि बीते 4 महीनों से उनका बेटा उनके संपर्क में नहीं है। उन्होंने बताया कि 4 महीने पहले केपी गोसावी के पास बॉडी गार्ड की नौकरी उसे मिली थी। तब से वह लगभग उन्हीं के साथ ही रहता था। लेकिन अब अचानक इस खुलासे के बाद उनकी चिंता और भी बढ़ गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। एक के बाद एक उनके ऊपर हो रहे आरोपों के मद्देनजर अब उनके खिलाफ इंटरनल इंक्वायरी का आदेश जारी किया गया है। विभागीय जांच का यह आदेश नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डीजी ने जारी किया है। अब समीर वानखेडे के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की विजिलेंस टीम जांच करेगी। समीर वानखेड़े की मुश्किलें अब दो तरफा बढ़ने वाली हैं। एक तरफ जहां खुद एनसीबी की तरफ से ही उनके खिलाफ जांच की जाएगी। वहीं अब प्रभाकर सैल के हलफनामे के बाद मुंबई पुलिस भी उनके खिलाफ एक्सटॉर्शन के आरोपों के तहत जांच शुरू कर सकती है। प्रभाकर सैल सोमवार की सुबह मुंबई के कमिश्नर ऑफिस पहुंचे थे।
आर्यन ड्रग्स केस में नया मोड़
इस केस के दो पंचों में से एक प्रभाकर सैल ने एनसीबी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सैल ने कोर्ट में एफिडेविट दिया है कि एनसीबी की तरफ से शाहरुख खान के बेटे पर केस न बनाने के लिए दूसरे पंच किरण गोसावी के जरिए रिश्वत मांगी गई थी। उन्होंने दावा किया कि 25 करोड़ रुपये की डीलिंग हुई थी। इसमें एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे को 8 करोड़ रुपये देने की बात उन्होंने फोन पर सुनी थी। समीर वानखेडे ने इन आरोपों को दुखद और निंदनीय करार देते हुए कहा कि यह एफिडेविट एनडीपीएस कोर्ट में है, इसलिए वहीं इसका जवाब देंगे। निजी जासूस किरण गोसावी और उनके बॉडीगार्ड प्रभाकर सैल को एनसीबी ने रेड के लिए पंच गवाह बनाया था। उनके सामने रेड की जानी थी। प्रभाकर का दावा है, 'रेड के वक्त गोसावी तो अंदर थे, लेकिन मैं बाहर था। बाद में एनसीबी ऑफिस ले जाकर मुझसे 10 सादा कागजों पर दस्तखत कराए गए। इसके बाद गोसावी किसी सैम डिसूजा से मिले।
मैंने गोसावी को सैम से फोन पर यह कहते सुना कि तुमने 25 करोड़ का बम रख दिया। चलो 18 पर फाइनल करते हैं क्योंकि हमें 8 करोड़ समीर वानखेडे को भी देने हैं।' प्रभाकर ने कहा कि मुझे एनसीबी अधिकारियों से जान का खतरा है। सैल ने कोर्ट में एफिडेविट तो दिया ही है, उसका विडियो भी सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि उसके सिग्नेचर 2 अक्टूबर को क्रूज शिप के अंदर या बाहर कहीं लिए ही नहीं गए।

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