दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़कों पर लगे बेवजह के बैरिकेड के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब


दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी की सड़कों व आवासीय कॉलोनियों की सड़कों पर पुलिस बैरीकेड के कारण आम लोगों को हो रही परेशानी के संबंध में दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा के नाम पर की गई बेरीकेटिंग से नागरिकों को असुविधा होती है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 24 नवंबर तय की है। यह जनहित याचिका जन सेवा वेलफेयर सोसायटी ने दाय की है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए दिल्ली की सड़कों और आवासीय कॉलोनियों में बेपरवाह और अनियमित पुलिस बैरिकेड लगा रखे हैं। याची ने कहा शहर में भारी यातायात जाम का एक कारण पुलिस द्वारा सड़कों की अनावश्यक बैरीकेडिंग है और दिल्ली भर में कई सड़कों पर लोहे के बैरिकेड लगाने में अधिकारियों के कुप्रबंधन और अव्यवसायिक रवैये से जनता की सुरक्षा, सुरक्षा और कल्याण के लिए गंभीर कठिनाई और असुविधा होती है।
अधिवक्ता बीरेंद्र बिक्रम और बांके बिहारी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां सड़कों पर जंजीरों में लगे बैरिकेड लगाने से जानलेवा साबित हुए है। सड़कों पर बैरिकेड लगाने को लेकर दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
याची ने कहा संगठन ने कहा कि उसने कई शिकायतें की हैं और यहां तक कि पुलिस आयुक्त को ज्ञापन भी दिया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश के अलावा याचिका में सिविल सोसायटी के सदस्यों सहित क्षेत्रवार समिति गठित करने, मोबाइल पुलिस बैरिकेड लगाने के लिए इलाके का सर्वेक्षण, पर्यवेक्षण और आकलन करने और अपनी रिपोर्ट पाक्षिक रूप से संबंधित पुलिस उपायुक्त को सौंपने की मांग की गई है। याचिका में मोबाइल बैरिकेड लगाने के लिए जिम्मेदार उन अधिकारियों की जवाबदेयी तय करने की मांग की है जिसके परिणामस्वरूप जानमाल का नुकसान हुआ।