महाराष्ट्र के औरंगाबाद में खून जमा देने वाला हत्याकांड, पहले हाथ की नस काटी, कान काटे, सिर पर हथौड़े से वार, फिर छाती पर बैठकर गला रेता


औरंगाबाद। महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। शहर में एक व्यक्ति की इतनी निर्ममता से हत्या की गई है कि सुनने वाले का मन सुन्न हो जाता है। यह जघन्य हत्याकांड रविवार की रात हुआ है। हालांकि यह हत्या कैसे हुई? इस बारे में अभी तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है। इस खून जमा देने वाले हत्याकांड की चर्चा पूरे शहर में है।
औरंगाबाद के मुकुंडवाड़ी पुलिस स्टेशन में डॉ राजेंद्र शिंदे की पत्नी मनीषा शिंदे द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, सिडको इलाके के संत तुकोबा नगर में डॉक्टर राजेंद्र शिंदे बेटी चैताली (20) बेटा रोहित (17) ससुर हरीभाऊ और सास चंद्रकला रहती हैं। रविवार की रात 9:30 बजे घर से सास-ससुर खाना खाकर सोने के लिए अपने घर अपने कमरे में चले गए थे। हालांकि दोनों बच्चे जाग रहे थे।
राजेंद्र किसी मित्र के मिलने के लिए बाहर गए हुए थे। वह रात को 11:30 बजे बाहर से ही खाना खाकर लौटे थे। जिसके बाद पति-पत्नी ने रात तकरीबन एक बजे तक साथ में टीवी देखा। मनीषा रात एक बजे सोने के लिए चली गई और बच्चों को भी सोने के लिए कहा। जबकि राजन हॉल में ही टीवी देख रहे थे। सुबह 6:15 बजे मनीषा हॉल में आई तब उन्होंने खून से लथपथ अपने पति डॉ राजन शिंदे को देखा। उनके दोनों बच्चे भी वहां नहीं थे।
डॉ राजन के बेटे ने सुबह पुलिस को इस जघन्य खून की जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस द्वारा की गई जांच के मुताबिक राजन शिंदे की बेहद ही क्रूरता के साथ हत्या की गई थी। उनके ऊपर एक के बाद एक जानलेवा वार किए गए थे। आखिर इतनी क्रूरता से किसने हत्या की होगी? इस सवाल का जवाब फिलहाल पुलिस भी तलाश रही है।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार डॉ राजेंद्र शिंदे शिंदे का लड़का सुबह 5 बजे जब हाल में आया तो उसने अपने पिता की खून से सनी लाश जमीन पर पड़ी देखी। उसने पिता को अस्पताल ले जाने के लिए घर के बाहर पार्किंग में खड़ी कार को निकाला और एंबुलेंस बुलाने के लिए एक निजी अस्पताल में गया। जब एंबुलेंस लेकर घर पहुंचा तो एंबुलेंस चालक ने इसे पुलिस केस बताकर सेवा देने से इनकार कर दिया। एंबुलेंस जाने के बाद बेटे ने अपनी बहन को नींद से उठाया और इस बारे में मां को कोई जानकारी नहीं दी। दोनों बच्चे चिश्तिया पुलिस चौकी में गए। यहां उन्होंने 100 नंबर फोन कर सुबह 6 बजे पूरी घटना की जानकारी दी। जिसके बाद दोनों घर वापस आए। तब तक उनकी मां भी उठ चुकी थी। कुछ भी देर बाद यह घटना पूरे शहर में आग की तरह फैल गई।
पुलिस के मुताबिक डॉ शिंदे के घर के सभी दरवाजे अंदर से बंद थे। घर में पत्नी, दोनों बच्चे और सास-ससुर थे। घर की कोई वस्तु भी पूरी नहीं हुई थी। दरवाजे भी टूटे हुए नहीं थे। डॉक्टर शिंदे के का खून हो जाने के बाद तुरंत पुलिस को नहीं बुलाया गया। पुलिस आने के पहले हाल में बिखरा खून साफ कर दिया गया था। बाहर से किसी के आने के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं। हॉल से लेकर कमरे तक किसी के पैरों के निशान भी नहीं नजर आ रहे हैं। इसलिए यह घटना गृह क्लेश की वजह से होने की आशंका जताई जा रही है।