न जलसा और न ही जुलूस, दिल्ली में इस बार शांती से होगा ईद मिलाद-उन-नबी का जश्न


नई दिल्ली। इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी अल अव्वल का चांद दिख चुका है यानी यह महीना शुरू हो चुका है। इस महीने की 12 तारीख को आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था। पूरी दुनिया में खासकर भारतीय उप महाद्वीप में यह दिन बहुत धूमधाम से बनाया जाता है। इसे ईद मिलाद उन नबी या बारावफात भी कहते हैं। इस बार ईद मिलाद उन नबी इंडिया में 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर दिल्ली की भी अलग-अलग मस्जिदों में प्रोग्राम होते हैं और कई जुलूस भी निकाले जाते हैं।
हालांकि, कोरोना की वजह से पिछले साल भी न तो मस्जिदों में प्रोग्राम हो पाए थे और न ही जुलूसों को निकाला जा सका था। इस बार भी पब्लिक गैदरिंग और जुलूस निकालने की इजाजत तो नहीं है। लेकिन लोगों ने अपने घरों में इस त्योहार को मनाने की तैयारी कर लीं हैं। कुछ मस्जिदों में भी प्रोग्राम होंगे लेकिन लोगों को जमा होने की इजाजत नहीं है। कोरोना काल से पहले तक दिल्ली की कुछ मस्जिदों में बहुत बड़े जलसे हुआ करते थे। सबसे बड़ा प्रोग्राम आईटीओ स्थित भूली भटियारी की मस्जिद में होता था। यहां ईद मिलाद नबी के मौके पर दिल्ली के कोने-कोने से लोग पहुंचते थे। यहां रात भर जलसा का आयोजन किया जाता है।
पिछले साल की तरह इस बार भी यहां लोगों के आने पर मनाही है। इसी तरह दिल्ली का सबसे बड़ा जुलूस बाड़ा हिंदुराव इलाके के निकालता है। इस कमिटी के जुड़े नवाब शमीम और नईम अहमद ने बताया कि यहां दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से कई जुलूस पहुंचते हैं और फिर एक बड़े जुलूस की शक्ल में सदर बाजार इलाके से होते हुए जामा मस्जिद तक यह जुलूस जाता है। इस साल यह जुलूस भी नहीं निकाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन के जुलूस के लिए मना कर देने के बाद हम लोगों ने इलाके के सभी लोगों से घर-घर जाकर भीड़ न लगाने की अपील की है और घरों में रहकर ही इबादत करने को कहा है। अगले साल अगर सब सही रहता है तो पहले की तरह ही जुलूस निकाला जाएगा। हालांकि जुलूस भले ही न निकले लेकिन लोगों ने अपने घरों और मोहल्लों की सजावट करने की पूरी तैयारियां कर ली हैं।