दिल्ली पुलिस आयुक्त को राहत, अदालती आदेश निरस्त


नई दिल्ली। अदालत ने पुलिस आयुक्त को राहत प्रदान करते हुए उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसके तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अदालत ने दिल्ली दंगों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल न करने पर पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।  कड़कड़डूमा अदालत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार ने दिल्ली पुलिस की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी कर दिया। दिल्ली पुलिस ने चीफ मेेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के 21 अक्तूबर के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में अदालत ने पुलिस आयुक्त के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की थी। मजिस्ट्रेट ने पुलिस आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा था कि 25 सितंबर के आदेश के अनुसार रिपोर्ट दाखिल न करने पर क्यों न उन पर कार्रवाई की जाए। वहीं इस आदेश को निरस्त करते हुए सत्र अदालत ने रिकार्ड के साफ है कि इस अदालत ने निचली अदालत के 25 सितंबर के आदेश पर 21 अक्तूबर को रोक लगा दी थी। इसलिए निचली अदालत के 21 अक्तूबर के आदेश को आदेश की अवेहलना नहीं कहा जा सकता क्योंकि ये आदेश इस अदालत के स्टे के बाद जारी किया गया।
सत्र अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का 21 अक्तूबर का आदेश सही नहीं था, इसलिए उस पर रोक लगाई जाती है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 25 सितंबर को जांच अधिकारी और सरकारी वकील के बार-बार तारीख लेने पर नाराजगी जाहिर करते हुए पुलिस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। वहीं पुलिस आयुक्त को इस मामले में जांच करने का आदेश दिया था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को इस बात पर गौर किया हालांकि पुलिस आयुक्त के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त ने जांच पूरी करने के लिए समय मांगा है लेकिन पुलिस आयुक्त की ओर से रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। इसके बाद अदालत ने केंद्रीय गृह सचिव के जरिये पुलिस आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा था कि क्यों न उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।