दिल्ली में बच्चों के भीख मांगने पर रोक, नए साल से होगी ट्रैकिंग


नई दिल्ली। दिल्ली में 70 हजार से ज्यादा बेघर बच्चे हैं और इनमें से कई हजार बच्चे भीख मांगने पर मजबूर हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग इन दिनों ऐसे हॉट स्पॉट की पहचान कर रहा है, जहां रोजाना बच्चे भीख मांगते हुए नजर आते हैं। अब तक 60 से ज्यादा लोकेशन का पता किया गया है। अगले महीने तक यह संख्या 150 तक पहुंचने की उम्मीद है। डीसीपीसीआर ने अपनी इस मुहिम के साथ दो महीने में 10 रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 65 बच्चों को रेस्क्यू किया है। आयोग का कहना है कि हमारे लिए बड़ी चुनौती बच्चों का पुनर्वास है। खासतौर पर उन मामलों में जहां पैरंट्स उनसे यह काम करवा रहे हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का कहना है कि रेस्क्यू किए गए बच्चे फिर से भिखारियों के जाल में ना फंसे, इसके लिए उनका एडमिशन, स्पॉन्सरशिप और ट्रैकिंग जरूरी है। इन बच्चों की ट्रैकिंग के लिए जल्द ही मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम तैयार किया जाएगा, जो नए साल से काम करने लगेगा।
DCPCR दिल्ली में नवंबर तक 150 लोकेशन कवर कर लेगा, जहां बच्चे भीख मांग रहे हैं। DCPCR के चेयरपर्सन अनुराग कुंडु के अनुसार हम माइक्रो लेवल पर हॉट स्पॉट की पहचान कर रहे हैं, जैसे ट्रैफिक सिग्नल या मेट्रो स्टेशन के गेट। दो महीने में 65 बच्चे रेस्क्यू किए गए हैं। ये बच्चे चार कैटिगरी में हैं। पहला, जिनसे पैरंट्स भीख मंगवाते हैं या वे खुद बच्चों के साथ भीख मांग रहे होते हैं। दूसरा, वे जिनके पैरंट्स नहीं हैं और उनके रिश्तेदार उनसे यह काम करवाते हैं। तीसरा, वे बच्चे जिनका कोई भी नहीं और वे सड़क पर हैं। चौथी कैटिगरी उन बच्चों की है, जिनसे कोई गिरोह भीख मंगवा रहा है। ये बच्चे छोटा-मोटा सामान भी बेचते हैं।
आयोग बच्चों को सड़क से रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के सामने पेश करता है। ज्यादातर मामलों में इनके पैरंट्स पहुंच जाते हैं और चेतावनी देकर बच्चा उन्हें सौंप दिया जाता है। बच्चे का स्कूल में एडमिशन करवाने में मदद दी जाती है और जरूरत पर 2-4 हजार रुपये भी दिए जाते हैं। जिन बच्चों का कोई सामने नहीं आता, उन्हें चिल्ड्रन होम भेज दिया जाता है।
आयोग के चेयरपर्सन कहते हैं कि अभी हमारा सबसे पहला फोकस होता है कि रेस्क्यू किए गए बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाएं। वहां उन्हें पढ़ाई के साथ साथ यूनिफॉर्म, मिड डे मील, स्कॉरशिप मिलने लगेगी। ज्यादातर पैरंट्स गरीबी की वजह से उनसे काम करवाते हैं, इसलिए बच्चों की स्पॉन्सरशिप जरूरी है। 18 जून को सरकार ने स्पॉन्सरशिप गाइडलाइंस लागू की है, जो जल्द ही बड़े लेवल पर हम लागू करवाने में मदद करेंगे। इसके हिसाब से ऐसे हर बच्चे को हर महीने दो हजार रुपये दिए जाएंगे। इसकी शुरुआत हो चुकी है।