गाजियाबाद में बुखार से पीड़ित सिपाही के आई कार्ड और नेम प्लेट पर ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव, डॉक्टरों ने चढ़ा दिया ए पॉजिटिव, हुई मौत


गाजियाबाद ब्यूरो। यशोदा अस्पताल में बुखार से पीड़ित मुरादाबाद के सिपाही निखिल कुमार की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। निवाड़ी के गांव नंगला निवासी परिजनों का कहना है कि निखिल का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था, लेकिन अस्पताल में उसे ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया। उन्होंने शनिवार को सिहानी गेट थाने पहुंच पुलिस से जांच कर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आश्वासन दिया कि सिपाही का ब्लड ग्रुप जानने के लिए बिसरा जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। गांव नंगला निवासी योगेंद्र सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे निखिल कुमार यूपी पुलिस में सिपाही थे। उसकी तैनाती मुरादाबाद के मैनाठेर थाने में थी। 14 अक्तूबर को निखिल को बुखार आया था। हालत बिगड़ने पर निखिल ने परिजनों को फोन किया।
बड़ा भाई निखिल को लेने मैनाठेर थाने पहुंचा तो वह बैरक में पड़ा हुआ था। इसके बाद उसे नेहरू नगर स्थित यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 अक्तूबर को उपचार के दौरान निखिल की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा। इसके लिए परिजन राजी हो गए। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
हालत बिगड़ जाने पर डॉक्टरों ने निखिल का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव बताते हुए परिजनों से खून की व्यवस्था करने को कहा था। तहेरे भाई सुधीर ने बताया कि निखिल के बड़े भाई और उसके दोस्त का ब्लड ग्रुप ए पाजिटिव था, लिहाजा दोनों ने निखिल को खून दिया। लेकिन इसके बाद हालत और बिगड़ती चली गई और निखिल ने दम तोड़ दिया। निखिल के पिता योगेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें मैनाठेर थाने से निखिल का बैग मिला। उसमें निखिल का आई कार्ड और नेम प्लेट मिली। उन्हें देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि दोनों पर निखिल का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव लिखा हुआ था। इसके बाद उन्होंने अस्पताल जाकर पूछा तो डॉक्टरों ने निखिल का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव ही होने की बात कही।
यशोदा अस्पताल के डॉक्टरों ने निखिल के आई कार्ड और नेम प्लेट पर ब्लड ग्रुप गलत प्रिंट होने की बात कही। जिसके बाद परिजन सिहानी गेट थाने पहुंचे और जांच की मांग की। सिहानी गेट एसएचओ ने परिजनों को आश्वासन दिया कि वह निखिल का बिसरा लैब में भेजकर ब्लड ग्रुप का पता कराएंगे। सोमवार को बिसरा लैब भेज दिया जाएगा।
निखिल के परिजनों का कहना है कि यह तो शुक्र है कि उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराया था, जिसके चलते उसका बिसरा सुरक्षित रख लिया गया था। अब बिसरा रिपोर्ट से यह राज खुलेगा कि पुलिस विभाग ने गलती से ब्लड ग्रुप गलत प्रिंट कर दिया या अस्पताल के डॉक्टरों ने लापरवाही की। 

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