अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वाले तालिबानी कमांडर पर आरोप तय


न्यूयॉर्क (अमेरिका)। अमेरिकी पत्रकार का अपहरण कर उसे कई महीनों तक पाकिस्तान में बंधक बनाकर रखने वाले तालिबान के पूर्व कमांडर हाजी नजीबुल्ला के खिलाफ 2008 में अमेरिकी सैनिकों की हत्या के मामले में आरोप तय किए गए हैं। अमेरिका के न्याय विभाग ने बताया कि हाजी नजीबुल्ला (45) उर्फ नजीबुल्ला नेम पर पहले 2008 में एक अमेरिकी पत्रकार और दो अफगान नागरिकों के अपहरण के मामले में आरोप तय किए गए थे। अफगानिस्तान के नागरिक नजीबुल्ला को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था और यूक्रेन से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। उसे उम्रकैद भी हो सकती है। न्यूयॉर्क में एक संघीय ज्यूरी ने बृहस्पतिवार को नजीबुल्ला के खिलाफ 2007 से 2009 तक संघीय आतंकवाद से संबंधित अपराधों और अफगानिस्तान में तालिबान कमांडर के रूप में उसकी भूमिका के संबंध में आरोप तय किए।
नजीबुल्ला पर 26 जून, 2008 को अमेरिकी सेना के एक काफिले पर हमला करने का आरोप है, जिसमें सार्जेंट फर्स्ट क्लास मैथ्यू एल हिल्टन, जोसेफ ए मैकके, सार्जेंट मार्क पामेटियर, एक अफगान दुभाषिये की मौत हो गई थी। इसके साथ ही उस पर, 27 अक्टूबर 2008 को अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को गिराने का आरोप है। न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी अटॉर्नी ऑड्रे स्ट्रॉस ने कहा कि अफगानिस्तान में संघर्ष के सबसे खतरनाक दौर में से एक के दौरान, नजीबुल्ला ने तालिबान विद्रोहियों के एक खतरनाक गिरोह का नेतृत्व किया, जिसने अफगानिस्तान के एक हिस्से को आतंकित किया और अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया।
स्ट्रॉस ने कहा, ‘‘ इन घातक हमलों में से एक में तीन बहादुर अमेरिकी सैनिकों और उनके अफगान दुभाषिये की मौत हो गई थी और एक अन्य हमले में एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को गिरा दिया गया था।’’ उन्होंने कहा कि नजीबुल्ला ने 2008 में एक अमेरिकी पत्रकार और दो अन्य लोगों का अपहरण करने की भी साजिश रची और उन्हें सात महीने से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा। हालांकि उन्होंने अमेरिकी पत्रकार के नाम का जिक्र नहीं किया। गौरतलब है कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के पत्रकार एवं दो बार के पुलित्जर पुरस्कार विजेता डेविड रोहडे और ‘‘दो अन्य को अफगानिस्तान में बंधक बना लिया गया था और सात महीने से अधिक समय तक इस तरह रखा गया था।’’ ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने पिछले साल एक खबर में कहा था कि रोहडे ‘‘ जून 2009 में पाकिस्ताान के कबायली इलाके उत्तरी वज़ीरिस्तान से तालिबान के ठिकाने से भाग निकले थे।